नयी दिल्ली 13 फरवरी (वार्ता) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को यहां ब्रह्मा कुमारीज़ के अखिल भारतीय सम्मेलन का उद्घाटन किया तथा ‘सशक्त भारत के लिए कर्मयोग’ नामक राष्ट्रव्यापी अभियान का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति सचिवालय ने बताया कि इस अवसर पर राष्ट्रपति ने गुरुग्राम स्थित ओम शांति ‘रिट्रीट सेंटर’ के रजत जयंती समारोह का भी शुभारंभ किया। श्रीमती मुर्मु ने कहा कि संतुलित और समग्र विकास के लिए नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिकता का भौतिक प्रगति के साथ समन्वय आवश्यक है। आर्थिक प्रगति समृद्धि को बढ़ावा देती है और तकनीकी प्रगति नवाचार, दक्षता तथा प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करती है। ये एक समृद्ध राष्ट्र की नींव रखते हैं। किन्तु नैतिकता के बिना आर्थिक और तकनीकी विकास समाज में असंतुलन उत्पन्न कर सकता है। उदाहरण के लिए, अनैतिक आर्थिक प्रगति से धन और संसाधनों का केंद्रीकरण, पर्यावरण को क्षति तथा समाज के कमजोर वर्गों का शोषण हो सकता है। नैतिक मूल्यों के बिना प्रौद्योगिकी का उपयोग मानवता के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि आध्यात्मिकता हमें मूलभूत मूल्य और नैतिक ढांचा प्रदान करती है, जो हमें कर्मयोग अर्थात निस्वार्थ सेवा का अभ्यास करने के लिए प्रेरित करता है। आध्यात्मिकता सत्यनिष्ठा, करुणा, अहिंसा और सेवा जैसे गुणों पर भी बल देती है। ये एक शांतिपूर्ण और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए आवश्यक सिद्धांत हैं। श्रीमती मुर्मु ने कहा कि ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय राजयोग की शिक्षा देता है। यह केवल एक स्थान पर बैठकर आत्मचिंतन करने तक सीमित नहीं है। कर्मयोग इसका एक मूलभूत अंग है। कर्मयोग का अर्थ है अपनी सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए उच्च आध्यात्मिक सिद्धांतों का पालन करना। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि ब्रह्मा कुमारीज़ से जुड़े लाखों लोग नियमित रूप से कर्मयोग का अभ्यास कर सार्थक जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्मयोग के माध्यम से इस देश का प्रत्येक नागरिक भारत के सतत और समग्र विकास में योगदान दे सकता है। इससे भारत न केवल आर्थिक रूप से प्रगति करेगा, बल्कि हम एक ऐसे समाज का निर्माण कर सकेंगे जो विश्व के लिए मूल्य-आधारित जीवन का आदर्श बनेगा।

