सीहोर में मानसून की बेरुखी, औसत से 115 मिमी कम बारिश; रबी की सिंचाई पर संकट

सीहोर। मानसून की विदाई की ओर बढ़ते ही जिले में अब बारिश की उम्मीद भी कमजोर पड़ गई है. इस बार मानसून सीजन में औसत 46 इंच बारिश का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो सका. अब तक जिले में सिर्फ 34.4 इंच यानी 860.9 मिमी बारिश दर्ज हुई है. सितंबर के बचे दिनों में भी तेज बारिश की संभावना कम है. मौसम विभाग के अनुसार सोमवार से कहीं-कहीं स्थानीय सिस्टम के कारण हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन यह कुछ मिनटों तक ही सीमित रहने की संभावना है. शनिवार को दिनभर आसमान साफ रहा और तेज धूप के साथ उमस में हुए इजाफे ने लोगों को परेशान किया.

बारिश का आंकड़ा बताता है कि इस बार मानसून ने जिले को औसत से काफी पीछे छोड़ दिया है। करीब 16 साल बाद ऐसा मौका बन रहा है, जब सीजन औसत से कम बारिश के साथ समाप्त होगा. इससे पहले 2010-11 में मानसून सीजन में महज 764 मिमी यानी करीब 30.5 इंच बारिश हुई थी. हालांकि 2014-15 में भी बारिश औसत से कम रही थी, तब 972 मिमी यानी 38.8 इंच बारिश दर्ज हुई थी. 2017-18 में 870.1 मिमी और 2018-19 में 906.6 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई थी. कुल मिलाकर मानसून की बेरुखी का खामियाजा आगामी महीनों में देखने को मिल सकता है.

15 सितंबर के बाद कमजोर पड़ता है मानसून

आरएके कॉलेज के मौसम वैज्ञानिक डॉ. सत्येंद्र सिंह तोमर के अनुसार सामान्य तौर पर 15 सितंबर के बाद मानसूनी गतिविधियां कमजोर पडऩे लगती हैं. कुछ वर्षों में सितंबर के अंतिम दिनों तक अच्छी बारिश हुई है, लेकिन इस बार पूरे मानसून सीजन में बारिश कराने वाले सिस्टम अपेक्षाकृत कम बने. 15 सितंबर के बाद कोई मजबूत सिस्टम नहीं बना है और आगे इसकी संभावना कम है. हालांकि स्थानीय मौसमीय परिस्थितियों से जिले के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है.

तालाब खाली, रबी की फसल पर पड़ सकता है असर

मानसून के दगा देने और कम बारिश का असर अब जलस्रोतों पर भी साफ दिखाई दे रहा है. जिले के कई तालाब अभी पूरी तरह नहीं भर पाए हैं. जावर और श्यामपुर क्षेत्र में स्थिति अधिक चिंताजनक बताई जा रही है. इसका सीधा असर आगामी रबी सीजन की सिंचाई पर पड़ सकता है. तालाबों में पर्याप्त जलभराव नहीं होने से किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए भूजल और अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ेगा. इसी तरह गर्मी के दिनों में पेयजल संकट की आशंका भी अभी से बन गई है.

रेहटी में पिछले साल से 304 एमएम कम बारिश

भू-अभिलेख शाखा के आंकड़ों के अनुसार जिले में सबसे अधिक 1082.4 मिमी बारिश सीहोर ब्लॉक में हुई है, जबकि जावर में सबसे कम 643 मिमी बारिश दर्ज की गई. रेहटी में 902.2 मिमी बारिश हुई, जो पिछले साल के 1206.6 मिमी के मुकाबले करीब 304 मिमी कम है. इसी तरह भैरूंदा में भी पिछले साल की तुलना में करीब 88 मिमी बारिश कम हुई है. जिले का औसत बारिश आंकड़ा 860.9 मिमी है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 976.4 मिमी बारिश हो चुकी थी.

 

 

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