उच्चतम न्यायालय ने प्रदूषण-मुक्त पर्यावरण को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी है: न्यामूर्ति सूर्यकांत

नयी दिल्ली, 19 सितंबर (वार्ता) मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने शुक्रवार को कहा कि भारत के उच्चतम न्यायालय ने पिछले कई दशकों में प्रदूषण-मुक्त पर्यावरण के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी है और पारिस्थितिकीय स्वास्थ्य को लेकर सावधानी के सिद्धांत, प्रदूषणकर्ता पर भुगतान का दायित्व के सिद्धांत , पूर्ण दायित्व तथा लोक न्यास के सिद्धांत जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांत विकसित किए हैं। वह यहां राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) द्वारा आयोजित दो दिन के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। ‘ पर्यावरण एवं जलवायु की आगे की गति ‘ के विषय के साथ आयोजित इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुख्य अतिथि थे।

सम्मेलन को वन एवं पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन मामलों के मंत्री भूपेंद्र यादव , अटार्नी जनरल आर वेंकटरमणी तथा एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने भी संबोधित किया।
प्रधानमंत्री ने एनजीटी ऐप का बटन दबाकर उद्घाटन किया जिसमें उपयोगकर्ता एनजीटी के सभी मामलों की स्थिति और प्रगति आदि की जानकारी अपने मोबाइल पर प्राप्त कर सकते हैं। इस सम्मेलन में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश 17 देशों के न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी, हरित न्यायाधिकरणों के न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, पर्यावरणविद् और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि जलवायु के संबंध में भारत के न्यायिक दर्शन ने लोगों के जलवायु से संबंधित अधिकारों को संवैधानिक दृष्टि से और अधिक स्पष्टता प्रदान की है। कानून के तहत न्यायाल ने माना है कि जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव समानता, आजीविका और स्वास्थ्य से संबंधित मौलिक अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने वैश्विक पर्यावरणीय संरक्षण को मजबूत करने के लिए न्यायिक सामूहिक विवेक, वैज्ञानिक ज्ञान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मामलों के मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जलवायु संबंधी भारत की प्रतिबद्धताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने एक सतत, सुदृढ़ और न्यायपूर्ण भविष्य के लिए सामूहिक कार्रवाई के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्ष में खनिज ईंधन से इतर स्रोतों से बिजली उत्पादन की स्थापित विद्युत क्षमता 54.18 प्रतिशत तक पहुंच गयी जो 2030 तक के लिए निर्धारित 50 प्रतिशत के लक्ष्य से अधिक है। श्री यादव ने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता के मामले में विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर है और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा विकास बाजार है। यह दर्शाता है कि आर्थिक विकास और जलवायु कार्रवाई एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

उन्होंने वन्यजीवों और पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण में भारत की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। इनमें चीता पुनर्वास कार्यक्रम, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण के लिए संरक्षण-प्रजनन कार्यक्रम तथा वनों, घास वाले क्षेत्रों और आर्द्रभूमियों के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन जैसे प्रयास शामिल हैं। वन एवं पर्यावरण मंत्री ने कहा कि भारत में वन और वृक्ष आवरण 8.27 लाख वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन की वन संसाधन रिपोर्ट – ग्लोबल फॉरेस्ट रिसोर्सेज असेसमेंट 2025 का उल्लेख करते हुए कहा कि वार्षिक शुद्ध वन क्षेत्र वृद्धि के मामले में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपना तीसरा स्थान बनाए रखा है। श्री यादव ने कहा कि अंटालिया (तुर्की) में होने वाले अगले जलवायु सम्मेलन -कॉप31 में भारत जलवायु संरक्षण संवर्धन दायित्व में समता, निर्णयों के क्रियान्वयन और जलवायु परिवर्तन के खतरे का सबसे अधिक सामना कर रहे देशों की जरूरतों पर केंद्रित जलवायु कार्रवाई की वकालत जारी रखेगा।

उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों, नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, व्यावहारिक विशेषज्ञों और दुनिया भर के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाने वाले ऐसे सम्मेलन उस समय अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जब पर्यावरणीय चुनौतियां राष्ट्रीय सीमाओं से परे जा चुकी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया के सामने विकल्प विकास और पर्यावरण के बीच नहीं, बल्कि सतत विकास और ऐसे विकास के बीच है जिसे लंबे समय तक कायम नहीं रखा जा सकता। मंत्री ने कहा कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी के प्रति भारत का दृष्टिकोण उसकी सभ्यतागत परंपरा में निहित है, जिसमें पृथ्वी को साझा विरासत और पवित्र न्यास के रूप में देखा जाता है।

इसी सत्र में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अपने संबोधन में कहा कि कोई भी देश अकेले पर्यावरणीय चुनौती का समाधान नहीं कर सकता और वैश्विक कार्रवाई को केवल घोषणाओं से आगे बढ़ाकर व्यावहारिक तथा लागू किए जा सकने वाले तंत्रों की दिशा में ले जाना आवश्यक है। “वैश्विक कार्रवाई वैश्विक महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप होनी चाहिए” -प्रधानमंत्री मोदी के इस आह्वान को उद्धरित करते हुए श्री वेंकटरमणी ने कहा कि भारत विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कायम करने के अपने मार्ग के माध्यम से उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है। उन्होंने पर्यावरणीय न्याय सुनिश्चित करने के लिए एक नए वैश्विक पर्यावरणीय नियामक ढांचे और मजबूत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा, आवास, स्वास्थ्य, जल, पारिस्थितिक तंत्र तथा आर्थिक अवसरों से जुड़े मुद्दों को भी इसमें शामिल करने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने कहा कि जलवायु के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा उठाये गये कदम न केवल राष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई के प्रति, बल्कि वैश्विक पर्यावरणीय सहयोग के प्रति भी देश की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने कहा कि ये पहलें एक स्वच्छ, हरित, अधिक सुदृढ़ और सतत भारत की व्यापक दृष्टि को प्रतिबिंबित करती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक संस्था या क्षेत्र की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय क्षरण के दुष्परिणाम अक्सर उन लोगों पर सबसे अधिक पड़ते हैं, जो इसके लिए सबसे कम जिम्मेदार होते हैं।

इस सम्मेलन का उद्देश्य पर्यावरण कानून और संस्थाओं को मजबूत करना, जलवायु न्याय और अंतर-पीढ़ीगत समानता को आगे बढ़ाना, टिकाऊ और सुदृढ़ शहरों को बढ़ावा देना, न्यायसंगत ऊर्जा संक्रमण को सुगम बनाना तथा सीमापार पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोगात्मक कार्रवाई को प्रोत्साहित करना है। सम्मेलन में अनुसंधान, सर्वोत्तम प्रथाओं और नवोन्मेषी समाधानों को साझा करने, साझेदारियां विकसित करने तथा भविष्य के सहयोग के लिए व्यावहारिक सिफारिशें और कार्ययोजना तैयार करने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

.....

Next Post

बगलामुखी नलखेड़ा में दर्दनाक हादसा 8 श्रद्धालुओं की मौत 

Sat Sep 19 , 2026
नलखेड़ा। नलखेड़ा माता बगला मुखी मंदिर परिसर के सामने से बह रहे नाले में एमपी 13 ए एफ 7135 फोर व्हीलर स्विफ्ट वाहन जिसमें उड़ीसा के आठ श्रद्धालु सवार थे। उज्जैन महाकाल दर्शन करने के बाद नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी के दर्शन करने आए लेकिन उन्हें मंदिर के सामने बह […]

You May Like