किफायती आवास की माँग को प्रभावित कर सकता है अमेरिकी आयात शुल्क

कोलकाता, 12 अगस्त (वार्ता) भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त अमेरिकी आयात शुल्क और 27 अगस्त से रूस के तेल आयात के कारण दंड के रूप में 25 प्रतिशत और आयात शुल्क लगाये जाने के फैसले का भारत के किफायती आवास क्षेत्र को संचालित करने वाले कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
एक अध्ययन के अनुसार, अगर दोनों देश आयात शुल्क के मुद्दे पर बातचीत करके संयम नहीं बरतते हैं तो देश के किफायती आवास क्षेत्र पर नकारात्मक असर होगा।
एनारॉक ग्रुप के कार्यकारी निदेशक (शोध एवं सलाह) डॉ. प्रशांत ठाकुर ने कहा, “45 लाख रुपये या उससे कम कीमत वाले घरों की श्रेणी पहले ही कोविड-19 महामारी से प्रभावित हो चुकी है और अब भी ठोस आधार की तलाश में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘अतिरिक्त’ आयात शुल्क इस क्षेत्र के लिए रही सही उम्मीद की किरण भी समाप्त कर देंगे।”
देश में किफायती आवास क्षेत्र में माँग मुख्य रूप से एमएसएमई और एसएमई उद्यमों में काम करने वाले लोगों की तरफ से आती है। ये उद्यम अपेक्षाकृत छोटे आकार के बावजूद देश के निर्यात तंत्र से गहरे जुड़े हैं। अमेरिका में आयात शुल्क बढ़ने का सीधा असर इन कंपनियों पर, और अंततः उनमें काम करने वाले कर्मचारियों पर पड़ेगा।
एनारॉक के आंकड़ों के अनुसार 2025 की पहली छमाही तक किफायती आवास की बिक्री हिस्सेदारी घटकर मात्र 18 प्रतिशत रह गई है, यानि शीर्ष सात शहरों में बेची गई कुल 1.90 लाख इकाइयों में से लगभग 34,565 किफायती आवास थे। वहीं, साल 2019 में कुल बिक्री में किफायती आवास की हिस्सेदारी 38 प्रतिशत से अधिक थी। यह दर्शाता है कि इस पर कितना बुरा असर पड़ा है।
किफायती आवास क्षेत्र देश की लगभग 1.46 अरब आबादी के लगभग 17.76 प्रतिशत लोगों की जरूरतों को पूरा करता है। नये लॉन्च में इसकी हिस्सेदारी 2019 के 40 प्रतिशत से घटकर 2025 की पहली छमाही में केवल 12 प्रतिशत रह गई है।
एमएसएमई रोजगार और निर्यात के क्षेत्र में अग्रणी होने के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी हैं। सरकारी अनुमानों के अनुसार एमएसएमई वर्तमान में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 30 प्रतिशत और निर्यात में 45 प्रतिशत से अधिक का योगदान देते हैं।
एमएसएमई और एसएमई मिलकर औपचारिक और अनौपचारिक रूप से 26 करोड़ से अधिक भारतीयों को रोजगार देते हैं खासकर कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो कंपोनेंट, रत्न और आभूषण, और खाद्य प्रसंस्करण जैसे श्रम-प्रधान उद्योगों में।
डॉ. ठाकुर ने कहा, “आयात शुल्क के कारण इस विशाल कार्यबल की भविष्य की आय में व्यवधान के कारण किफायती आवास की मांग पटरी से उतर सकती है और इस अत्यधिक आय-संवेदनशील क्षेत्र में बिक्री को और प्रभावित कर सकती है।” उन्हाेंने कहा कि मांग में इस तरह की गिरावट से डेवलपर्स द्वारा नये लॉन्च में कमी आयेगी।

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