जबलपुर भाजयुमो अध्यक्ष के लिए भोपाल से भी लगाया जा रहा जोर.

महाकौशल की डायरी

अविनाश दीक्षित

महाकौशल के नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला में भारतीय जनता युवा मोर्चा अध्यक्ष के नाम की घोषणा के लिए रस्साकशी उतनी नहीं है कि भोपाल में बैठे पार्टी के शीर्ष नेताओं को माथापच्ची के साथ कई तरह के कटाक्ष को सुनना पड़े, लेकिन बात जबलपुर की करें तो यहां के भाजयुमो अध्यक्ष के प्रबल दावेदार के नाम पर मुहर लगाने से पहले भोपाल में बैठे शीर्ष नेताओं का बड़ा समूह पिछले कुछ दिनों से चैन से रह नहीं पा रहा है।भगवादल के गलियारों में चल रहीं चर्चाओं पर गौर करें तो खुद भोपाल के शीर्ष नेताओं का समूह चाह रहा है कि जल्द से जल्द जबलपुर में भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर दिया जाए, मगर जमीनी तौर पर यह काम पूरा होते हुए उतना आसान नहीं दिख रहा है।

हैरानी की बात तो यह निकलकर आ रही है कि जबलपुर में अपनी पसंद का भाजयुमो अध्यक्ष बनवाने के लिए जबलपुर ही नहीं बल्कि प्रदेश में बैठे पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष से लेकर प्रदेश स्तरीय अन्य बड़े नेता ऐड़ी चोटी का जोर लगाने में भिड़े हैं। भाजपाई खेमे की चर्चाओं के अनुसार एबीवीपी से श्रवण सिंह राठौर को भाजयुमो अध्यक्ष बनाने के लिए प्रदेश स्तर के बड़े भाजपा नेता श्याम टेलर, ईशान के लिए सांसद आशीष दुबे, विधायक अभिलाष पांडे, श्याम टेलर लाबिंग कर रहे हैं। शुभम अरिहंत के लिए भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष शैलैंद्र, रौनक अग्रवाल के लिए संदीप जैन, वहीं रविंद्र तिवारी के लिए लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह और भाजपा नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर प्रयासरत हैं।

खबर यह भी पुख्ता है कि जबलपुर भाजपा जिला अध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने मंत्री राकेश सिंह का सहारा लेकर जबलपुर पूर्व विधानसभा से प्रबल दावेदार रविंद्र तिवारी को भाजयुमो अध्यक्ष बनने के लिए भोपाल में एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है, लेकिन इस जोर को प्रदेश स्तर के नेताओं की वजनदारी कितना हल्का करती है यह आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई अंतर्कलह सामने नहीं आई है लेकिन व्हॉट्सएप ग्रुपों में चल रहीं बातों, कटाक्षों पर दृष्टिपात करें तो अपने अपने पसंद के युवा नेता को इस पद पर बैठाने की लड़ाई, अब आत्म सम्मान और वर्चस्व स्थापित करने की लड़ाई बन गई है। अंतिम मुहर किस नाम पर लगती है यह तो समय ही बताएगा, परन्तु अध्यक्ष के नाम के ऐलान के बाद जो होगा उसे साधना और फिर आगामी चुनाव में पार्टी के हित में उन्हें मनाना, यह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने बड़ी चुनौती का सबब बन सकता है। राजनैतिक जानकारों की मानें तो चाहे कोई कुछ भी कर ले पर अंतिम निर्णय जबलपुर में भारतीय जनता पार्टी के भाजपा जिला अध्यक्ष की पसंद पर ही लिया जाएगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि अब जल्द से जल्द जबलपुर में भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर दिया जाएगा और तमाम सवालों को विराम दे दिया जाएगा। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर एक माह तक होने वाले विभिन्न कार्यक्रम शुरू हो गये हैं, ऐसे में नये भाजयुमो अध्यक्ष की घोषणा होने के आसार कम ही लग रहे हैं।

जनआक्रोश का भरता जा रहा घड़ा….

कहां गायब हो गए साहब, अब तो वक्त है जनता के बीच आकर उनके सवालों के जवाब देने का.. ये बातें बालाघाट में इन दिनों आम आदमी के मुंह पर बसी हुई है। इसकी मुख्य वजह बैगा आदिवासी अंचल में बच्चों की मौतें होना और दूसरी तरफ किरनापुर में मरारमाली समाज का प्रदर्शन हिंसक झड़प के रूप में बदलना रहा । दोनों घटनाओं की परिस्थितियां अलग हैं लेकिन सड़कों पर बढ़ रही लोगों की बैचैनी अब जिम्मेदारों को कटघरे में खड़ा कर रही है। क्षेत्रीय जनता आस लगाए बैठे है कि जिम्मेदार सांसद और विधायक उनके पास आएं लेकिन फिलहाल अभी किसी जिम्मेदार ने ऐसा नहीं किया है जिसका नतीजा है कि बालाघाट में जनआक्रोश धीरे धीरे अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका है। बैगा बच्चों की मौत का मामला हो या किरनापुर में पुलिस के खिलाफ आक्रोश, जनता चाह रही है कि सिर्फ उनकी बात सुनी जाए और शिकायतों की निष्पक्ष जांच के साथ जिम्मेदारी तय हो। मगर मौजूदा हालात जो बयां कर रहे हैं उससे तो साफ है कि बालाघाट में सतत उपेक्षा की छोटी सी चिंगारी कभी भी दावानल का रूप ले सकती है जिसे सम्हाल पाना भी जिला प्रशासन के लिए मुश्किल साबित हो सकता है। हैरानी होती है जब ये पता चलता है कि इतने गंभीर मुद्दों के बाद जिम्मेदार जनप्रतिनिधि मुंह छिपाकर बैठे रहें और सड़कों पर निर्दोषों की जान पर बन आए। खबर है कि बालाघाट के जिम्मेदारों का समूह इस बात का इंतजार कर रहा है कब मामला शांत हो और फिर वह जनता के सामने आकर बयानबाजी करें। किन्तु ये देरी कहीं एक और बड़ी घटना की वजह न बन जाए ये अपने आप में एक सबसे बड़ा सवाल बनकर खड़ा हुआ है। देखना होगा कि जिम्मेदारों की चुप्पी आखिर कब तक रहेगी।

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