ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे
लगता है कि ग्वालियर भाजपा में दोनों प्रतिद्वंदी खेमों नरेन्द्र सिंह और सिंधिया के कट्टर समर्थकों के बीच पाला बदल का खेल चल रहा है। पहले मुरार से एमएलए रह चुके पुराने नेता रामवरण सिंह महल के प्रति आस्थाओं को झटक कर नरेन्द्र सिंह के साथ चले गए और अब इसी कड़ी में मुरार के ही एक और बड़े सिंधिया समर्थक नेता मुन्नालाल गोयल का नाम जुड़ गया है। पहले उड़ती उड़ती खबर गरमाई कि मुन्नालाल अब सिंधिया शिविर छोड़कर नरेंद्र सिंह के अनुयायी बन गए हैं लेकिन जब सिंधिया खेमे के वफादारों की ओर से मुन्नालाल पर गद्दारी की तोहमत लगाते हुए उनके खिलाफ सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मुहिम छेड़ दी गई और मुन्ना समर्थकों द्वारा इसका कोई प्रतिवाद नहीं किया गया तो खबर को सही मान लिया गया।
कहते हैं कि मुन्ना 23 के विधानसभा चुनाव के समय से ही महाराज से नाराज चल रहे हैं जब महल की गृहभूमि कही जाने वाली ग्वालियर पूर्व सीट से उनका टिकट काटकर सिंधिया परिवार की निकट संबंधी माया सिंह को दे दिया गया था। टिकट कट जाने के बाद मुन्ना समर्थकों ने बारादरी चौराहे पर बगावती तेवरों का इजहार भी किया था। हालांकि बाद में मुन्ना ने महाराज के कहने पर मायासिंह का प्रचार भी किया लेकिन वे जीत नहीं सकी थीं। बहरहाल, रामवरण और मुन्नालाल के बाद सिंधिया शिविर छोड़कर जाने वालों की फेहरिस्त में जल्द ही कुछ और नाम जुड़ सकते हैं।
न्यौता नहीं आया, तब भी इंदौर कूच कर रहे कांग्रेसी
किसी ने लिखा है “बुलाने वाले ने जब बुलावा नहीं भेजा, हमने भी दर पर उसके आना छोड़ दिया।” लेकिन ग्वालियर चंबल के कांग्रेसवालों का इसमें यकीन नहीं है। राहुल गांधी के 19 को इंदौर में हो रहे छात्रों की गूंज कार्यक्रम का न्यौता अभी तक ग्वालियर के पार्टीवालों को नहीं पहुंचा है, लेकिन उन्हें इसका अफसोस नहीं है। दिल्ली से लेकर भोपाल तक पार्टी के हर प्रोग्राम में एक्टिव रहने वाले कांग्रेस नेताओं ने पहले इंदौर बुलावे का इंतजार किया, जब नहीं आया तो शुक्रवार के रोज मालवा नगरी के लिए कूच करने सामान पैक कर लिया है। ग्वालियर के कांग्रेस सदर सुरेन्द्र यादव मानते हैं कि अभी तक पदाधिकारियों को आधिकारिक बुलावा तो नहीं आया है लेकिन हम किसी को जाने से रोक भी नहीं रहे हैं। ग्वालियर में छात्रों की गूंज मुहिम के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे मितेंद्र दर्शन सिंह पहले ही इंदौर में डेरा जमा चुके हैं, जबकि कुलदीप कौरव समेत उनकी बाकी टीम आज कूच करेगी। ग्वालियर देहात कांग्रेस के सदर पीडी जौहरे भी सैकड़ों छात्रों को लेकर इंटरसिटी से रवाना हो रहे हैं। प्रदेश भर से पंजीयन तो करीब दो लाख हुए हैं लेकिन अंदरखाने, करीब 25 हजार के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। संभाग के हर जिले से करीब सौ-सौ जेन-जी को सिलेक्ट किया है सो अलग।
विधायक से आदिवासियों की नाराजगी का मामला पहुंचा भोपाल
डबरा ब्लॉक के आदिवासी परिवार अपनी बुनियादी समस्याओं को लेकर नगर पालिका से लेकर एसडीएम तक गुहार लगाने के बाद जब थक हार कर एक बार फिर से डबरा एसडीएम के दफ्तर पर धरना प्रदर्शन करने पहुंचे तो कई बार बुलाने के बावजूद विधायक सुरेश राजे नहीं आए, इस पर आदिवासी समाज भड़क गया है। आदिवासी नेता इस बात पर नाराज हैं कि वे अपनी समस्या कई बार विधायक को बता चुके हैं लेकिन वे न तो समस्या का निराकरण करा सके और जब उन्हें धरना प्रदर्शन की सूचना दी गई, वे तब भी नहीं आये। सुरेश राजे यहां से दूसरी बार विधायक चुने गए हैं और अब तीसरी बार की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस हलकों में सवाल यही पूछा जा रहा है कि डबरा में जीत हार की निर्णायक भूमिका निभाने वाले आदिवासी वोटबैंक की नाराजगी मोल लेकर मिशन 28 की वैतरणी वे कैसे पार कर सकेंगे। गौरतलब है कि इस आदिवासी आंदोलन में किसान कांग्रेस, अनुसूचित जाति विभाग सहित पार्टी के जिलाध्यक्ष पीडी जौहरे सहित कई बड़े नेता मौजूद थे। बहरहाल, विधायक की गैरमौजूदगी का मामला प्रदेश नेतृत्व तक पहुंच गया है।
कार्यसमिति में सिफारिशी चेहरों को मौका
जो असंतोष पिछले कई महीनों से भाजपा की अंत:वीथिकाओं में खदबदा रहा था, वह जिला कार्यसमिति की घोषणा के साथ ही खुलकर उजागर हो गया। जिला और प्रदेश बॉडी में कई मर्तबा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके गुरुजी के नाम से विख्यात सत्येन्द्र सिंह भदौरिया ने तो लंबी चौड़ी पोस्ट लिखकर कह दिया कि पार्टी ने उन्हें कार्यसमिति से बाहर कर दिया तो वे भी अब मन की भड़ास खुलकर लिखने के लिए स्वतंत्र हैं। दर्पण कॉलोनी, थाटीपुर क्षेत्र में खासा असर रखने वाले मुकेश सिंह तोमर ने भी कार्यसमिति की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। यह सच भी है कि चुनाव के वक्त बूथ मैनेजमेंट से लेकर ईवीएम को कमलमय करने में मशक्कत करते रहे कार्यकर्ताओं को हाशिए पर रखकर अनपहचाने और सिफारिशी लोगों से कार्यसमिति भर दी गई है। वंचित कार्यकर्ताओं ने साफ कह दिया है कि पार्टी उनसे अब मिशन 28 के लिए कोई भी उम्मीद न लगाए।
