न्याय की आस में अनशन पर बैठे कल्पना के पिता को प्रशासन ने उठाया

रीवा, रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल मेें लापरवाही के चलते बेटी कल्पना मिश्रा एवं नवजात शिशु की मौत हो गई थी. जिसके बाद न्याय की गुहार लगाते हुए बेवश पिता सिरमौर चौराहा में अनिश्चित कालीन आमरण अनशन पर बैठ गये. 14 दिन से अनशन चल रहा था, बुधवार की दोपहर 15 वें दिन भारी संख्या में पहुंची पुलिस एवं प्रशासन ने अनशन पर बैठे पिता रामशिरोमणि को जबरन सीधे उठाकर एम्बुलेंस से जिला चिकित्सालय में ले जाकर भर्ती करा दिया. प्रशासन का कहना है कि जीवन बचाना हमारी पहली प्राथमिकता है. गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. प्रशासन ने जैसे ही अनशन स्थल पर हटाने की कार्यवाही की और टेंट को जप्त कर लिया. उसी दौरान हंगामे की स्थित बन गई, धरने के समर्थन में बैठे लोगो ने जमकर विरोध किया. दर्जन भर लोगो को पुलिस पकड़ कर कंट्रोल रूम ले गई. आधे घंटे के अंदर पूरा अनशन स्थल खाली हो गया. नगर निगम ने टेंट का सामान जप्त कर लिया.

उल्लेखनीय है कि बेटी कल्पना मिश्रा एवं नवजात शिशु की मौत 26 अगस्त को गांधी मेमोरियल अस्पताल में हुई थी. इस लापरवाही एवं न्याय के लिये बेवश कल्पना के पिता रामशिरोमणि मिश्रा सिरमौर चौराहा में 2 सितम्बरको आमरण अनशन पर बैठ गये थे. 14 दिन से आमरण अनशन चल रहा था. बीच में कलेक्टर-एसपी ने समझाइश भी दी थी और उनके स्वास्थ्य की जांच भी हो रही थी. दरअसल बेटी की मौत को लेकर दोषियों के खिलाफ एफआईआर की मांग रामशिरोमणि कर रहे थे. बुधवार की दोपहर 15 वें दिन अचानक एसडीएम, सीएसपी सहित भारी पुलिस बल पहुंचा और देखते ही देखते अनशन पर बैठे रामशिरोमणि को चादर सहित उठाकर सीधे एम्बुलेंस में लाद दिया. लोग विरोध करते रहे, लेकिन किसी ने नही सुनी. आनन-फानन एम्बुलेंस सीधे जिला अस्पताल बिछिया पहुंची. जहा आईसीयू वार्ड में उनको भर्ती किया गया. अनशन स्थल को नगर निगम ने चंद मिनट में तहस-नहस कर दिया और पूरा सामान जप्त कर लिया.

जीवन बचाना पहली प्राथमिकता: कलेक्टर

कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि रामशिरोमणि जी पिछले 14 दिन से आमरण अनशन पर बैठे थे, लगातार उनका स्वास्थ्य गिर रहा था. हमारी प्राथमिकता है किसी की जान बचाना. उनके स्वास्थ्य की चिंता प्रशासन को थी, इसी लिये जिला चिकित्सालय के आईसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया है. बेटी की मौत का दुख हम सबको है, सरकार-प्रशासन सब उनके साथ है. मुख्यमंत्री खुद पूरे मामले को देख रहे है और दो-दो जांच चल रही है. साथ ही डीन और अधीक्षक को हटाया गया है, जो भी जांच रिपोर्ट सामने आएगी उसके आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी, फिलहाल उपचार चल रहा है.

जनता का फूटा आक्रोश

बेटी की मौत के बाद न्याय की आस में 15 दिन से लोकतांत्रिक तरीक से आमरण अनशन पर बैठे पिता को प्रशासन उठा ले गया. सिस्टम की लापरवाही का शिकार हुई कल्पना मिश्रा के लिये न्याय की आवाज उठा रहे उनके पिता को प्रशासन ने बल पूर्वक उठा लिया. अनशन स्थल का जो दृश्य था उसे देख समर्थक और जनता का आक्रोश फूट पड़ा. हर किसी ने प्रशासन की इस कार्यवाही की निंदा की और कहा कि जो मांग थी एफआईआर दर्ज करने की, वह पूरी नही हुई. जबरन उठाकर अस्पताल पहुंचाना कहा का न्याय है. जिस समय उठाने की कार्यवाही चल रही थी, उस दौरान वहा मौजूद लोगो ने विरोध भी किया लेकिन पुलिस बल के चलते किसी की एक न चली.

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