विधि सेवा फर्मों की भारतीय संस्था ‘सिल्फ’ बैंकॉक में एशियायी फोरम शुरू करेगी

नई दिल्ली, 16 सितंबर (वार्ता) भारत की लॉ फर्मों की प्रमुख संस्था ‘सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स (सिल्फ) 18 सितंबर ने बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ‘एशियन लीगल एकॉर्ड’ नाम से विधि फर्मों का एक क्षेत्रीय मंच बनाने की घोषणा की है।

सिल्फ की ओर से बुधवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार आउरेलिस- 2026 (एशियन यूनियन फॉर रेगुलेटरी एंड इमर्जिंग लीगल इनक्लूसिव सिस्टम्स) नाम से इस आयोजन में एशिया और मध्य पूर्व के विभिन्न न्याय – क्षेत्रों से करीब 150 कानूनी पेशेवर, लॉ फर्म, जनरल काउंसल और कानूनी संस्थान हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन इस ढांचे की समीक्षा और उसे आगे बढ़ाने के लिए एक वार्षिक मंच के रूप में काम करेगा, जिससे इस पहल को पहले सम्मेलन के बाद भी निरंतरता मिल सके।

संगठन ने कहा है कि आउरेलिस-2026 और एशियन लीगल एकॉर्ड के माध्यम से सिल्फ का उद्देश्य भारतीय लॉ फर्मों और व्यापक एशियाई कानूनी समुदाय के बीच संस्थागत और पेशेवर संबंधों को मजबूत करना है। सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण एशियन लीगल एकॉर्ड पर लाइव हस्ताक्षर होगा। सिल्फ के अध्यक्ष डॉ. ललित भसीन ने कहा कि यह पहल एशिया के लिए एक साझा कानूनी ढांचा विकसित करने और क्षेत्रीय स्तर पर निरंतर कानूनी सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

श्री भसीन ने कहा, “जिस तरह व्यापार, निवेश, तकनीक और कारोबार तेजी से राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़ रहे हैं, उसी तरह एशिया में कानूनी पेशे को भी अधिक संवाद और सहयोग की दिशा में आगे बढ़ना होगा। एशिया में अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाएं और नियामकीय ढांचे हैं। सीमा-पार विवाद समाधान, निजी डाटा की सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल व्यापार जैसे मुद्दे नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं, जिन्हें अलग-अलग देशों के दायरे में रहकर नहीं देखा जा सकता। जरूरत इस बात की है कि हर देश की संप्रभुता और विशिष्ट कानूनी परंपराओं का सम्मान करते हुए विभिन्न न्याय क्षेत्रों के कानूनी पेशेवरों के बीच मजबूत संस्थागत संबंध विकसित किए जाएं।”

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के आह्वान के अनुरूप, एशियन लीगल एकॉर्ड सिल्फ की ऐसी पहल है, जिसका उद्देश्य पूरे एशिया के कानूनी समुदाय को संवाद, ज्ञान के आदान-प्रदान और पेशेवर सहयोग के लिए एक साझा मंच पर लाना है।

एशियन लीगल एकॉर्ड के तहत निवेश, बौद्धिक संपदा, सीमा-पार विवाद समाधान, प्रतिभाओं की आवाजाही और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक ढांचा तैयार किया जाएगा।

यह समझौता एशिया के कानूनी समुदाय के बीच संवाद, सहयोग और संस्थागत विकास के लिए एक आधार के रूप में काम करेगा। साथ ही, विभिन्न देशों की अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं और परंपराओं का सम्मान करते हुए आपसी सहयोग को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।

 

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