जम्मू-कश्मीर ने दो साल के अंतराल के बाद एमएमयू उलेमा बैठक की अनुमति दी, दो प्रस्ताव पारित

श्रीनगर, (वार्ता) जम्मू-कश्मीर के सबसे बड़े धार्मिक संगठन ‘मुताहिदा मजलिस-ए-उलेमा’ (एमएमयू) ने मंगलवार को नशीली दवाओं और नशीले पदार्थों के बढ़ते दुरुपयोग के साथ-साथ युवाओं का धार्मिक संस्थानों और मुस्लिम समुदाय की एकता से बढ़ते अलगाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

एमएमयू ने दो साल से अधिक के अंतराल के बाद अधिकारियों द्वारा आयोजित करने की अनुमति मिलने पर हुई अपनी बैठक में दो प्रस्ताव पारित किए। ये प्रस्ताव पर्यावरण के नुकसान सहित समकालीन सामाजिक चुनौतियों का सामना करने में धार्मिक संस्थानों की भूमिका पर केंद्रित थे। एमएमयू के एक बयान के अनुसार जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के धार्मिक विद्वानों की उपस्थिति में हुई इस बैठक में उलेमा, मस्जिदों और मदरसों से चुनौतियों का समाधान करने और युवाओं से जिम्मेदार और रचनात्मक सामाजिक व्यवहार में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।

बैठक में विशेष रूप से युवाओं में आत्महत्या और खुद को नुकसान पहुंचाने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की गई। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि धार्मिक संस्थान ऐसी सुरक्षित जगहें बनाकर एक महत्वपूर्ण निवारक और सहायक भूमिका निभा सकते हैं जहां युवा और परिवार बिना किसी सामाजिक कलंक और डर के अपनी व्यक्तिगत भावनात्मक परेशानी, अकेलेपन, चिंता, पारिवारिक दबाव और अन्य कारणों के बारे में खुलकर बात कर सकें।

बैठक में दूसरा प्रस्ताव मुस्लिम समुदाय में एकता और अलग-अलग पंथ व व्याख्याओं के बावजूद आपसी सम्मान बनाए रखने में उलेमा की जिम्मेदारी पर केंद्रित था। सम्मेलन ने माना कि समुदाय के भीतर अलग-अलग विचारधाराएं और जायज धार्मिक मतभेद रहे हैं और आगे भी रहेंगे। ऐसे मतभेदों को हालांकि कभी भी नफरत, दुश्मनी या बंटवारे का कारण नहीं बनने देना चाहिए।

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