उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने निजी सहायक पर लगे आरोपों के बाद कांग्रेस पार्टी के दो पदों से इस्तीफा देने जा रहे हैं

देहरादून, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत अपने निजी सहायक (PA) चंदन सिंह जीना के परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया छापेमारी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद गहरे आहत हैं। साल 2016 के UKSSSC घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा 32 लाख नकद और सोने-घड़ियां बरामद किए जाने के सार्वजनिक होने के बाद, हरीश रावत ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी के दो दायित्व वाले पदों से हटने की इच्छा जताई है। इसी सिलसिले में वह सोमवार या मंगलवार को नई दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर अपनी मंशा जाहिर करेंगे।

प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को पत्र लिखकर भेजेंगे इस्तीफा, आंदोलन या पार्टी की लड़ाई में व्यवधान न बने वजह

केंद्रीय नेतृत्व से मिलने के अलावा हरीश रावत उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल को भी पत्र भेजकर अपने फैसले से अवगत कराएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी से नाराजगी या दबाव का मामला नहीं है, बल्कि वह ऐसा इसलिए करना चाहते हैं ताकि उनके या उनके सहयोगी से जुड़े प्रकरण के कारण पार्टी द्वारा लड़ी जा रही जनहित की किसी भी लड़ाई में कोई व्यवधान पैदा न हो। 1980 से उनके साथ जुड़े रहे भरोसेमंद सहयोगी चंदन सिंह जीना के मामले को लेकर उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि जीवन में आगे जो भी परिस्थितियां आएंगी, वह उनका सामना करेंगे।

बीजेपी ने पूरे घटनाक्रम को बताया सियासी ड्रामा और सहानुभूति कार्ड, कांग्रेस नेताओं ने ईडी की कार्रवाई पर उठाए सवाल

हरीश रावत द्वारा पदों से इस्तीफे की इस पेशकश के बाद राज्य की सियासत में भूचाल आ गया है, जहां एक तरफ विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस पूरे घटनाक्रम को एक राजनीतिक ड्रामा और जनता की सहानुभूति बटोरने का ‘सहानुभूति कार्ड’ करार दिया है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस पूरी कार्रवाई के समय और तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया है और संकट की इस घड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ अपनी पूरी एकजुटता प्रदर्शित की है।

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