मौसम बदला तो अस्पतालों में बढ़े वायरल के मरीज

देवास। मौसम के लगातार बदलते मिजाज का असर अब लोगों की सेहत के साथ खेतों पर भी दिखाई देने लगा है। पिछले कुछ दिनों से कभी तेज धूप तो कभी बारिश होने से तापमान में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। बारिश ने जहां लोगों को गर्मी और उमस से राहत दी है, वहीं बदलते मौसम के बीच सर्दी-जुकाम, वायरल फीवर और मौसमी बीमारियों के मरीज बढ़ने लगे हैं। सरकारी अस्पताल से लेकर निजी क्लीनिकों तक उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। दूसरी ओर खेतों में बारिश से सोयाबीन की फसल को राहत मिली है, लेकिन आने वाले समय में गेहूं और चना जैसी रबी फसलों के लिए पर्याप्त पानी को लेकर किसानों की चिंता बनी हुई है।

दिन में धूप निकलने और बीच-बीच में बारिश होने से मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। कभी गर्मी और उमस तो कभी ठंडक महसूस होने के कारण लोगों की दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है। इसका असर खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों में दिखाई दे रहा है। सर्दी, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और बुखार जैसी शिकायतों के साथ लोग चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं।

चिकित्सकों का कहना है कि बदलते मौसम में खान-पान और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। बारिश के दौरान आसपास जमा पानी, दूषित खाद्य पदार्थ और अचानक तापमान में बदलाव मौसमी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। ऐसे में पर्याप्त पानी पीने, ताजा भोजन करने और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

सोयाबीन के लिए बारिश राहत, रबी फसलों की चिंता-

मौसम का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। खेतों में भी बारिश को लेकर किसानों की नजर आसमान पर बनी हुई है। फिलहाल हुई बारिश को सोयाबीन की फसल के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। खेतों में नमी बनी रहने से फसल को बढ़वार में मदद मिल रही है। हालांकि आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति रबी सीजन की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।

किसानों के सामने सबसे बड़ी चिंता जल स्रोतों में पानी की उपलब्धता को लेकर है। गेहूं और चना की बोवनी तथा आगे चलकर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी जरूरी होगा। यदि बारिश का दौर कमजोर रहा तो सिंचाई के लिए परेशानी होगी।

पिछले साल की तुलना में कुएं का जलस्तर कम-

ग्राम बड़ी चुरलाई के किसान जगपालसिंह सिकरवार के अनुसार इस बार जल स्रोतों की स्थिति पिछले वर्ष की तुलना में कमजोर नजर आ रही है। उन्होंने बताया कि पिछले साल इस समय तक खेत के कुएं में पर्याप्त पानी उपलब्ध था, जबकि इस वर्ष जलस्तर काफी कम है। सोयाबीन के लिए अभी मौसम अनुकूल है, लेकिन गेहूं-चना सहित अन्य रबी फसलों की सिंचाई के लिए आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश की जरूरत रहेगी।

राजोदा के किसान विष्णु पांचाल का कहना है कि वर्तमान बारिश सोयाबीन के लिए राहत लेकर आई है, लेकिन रबी सीजन की पूरी तस्वीर आगे होने वाली बारिश पर निर्भर करेगी। यदि समय पर अच्छी बारिश होती है तो जल स्रोतों में पानी की स्थिति सुधर सकती है और किसानों को रबी फसलों की सिंचाई में राहत मिल सकती है।

मौसम पर टिकी सेहत और खेती दोनों की नजर-

फिलहाल बदला हुआ मौसम शहरवासियों के लिए गर्मी से राहत लेकर आया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकों के लिए मौसमी बीमारियों की चुनौती बढ़ी है। वहीं किसानों के लिए यही बारिश खरीफ की फसल को संवारने के साथ रबी की तैयारी के लिए उम्मीद भी जगा रही है। अब आने वाले दिनों का मौसम ही तय करेगा कि बारिश लोगों की सेहत और खेती, दोनों के लिए कितनी राहत लेकर आती है।

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