राजनांदगांव में बिजली शिकायत व्यवस्था पर सवाल, कॉल सेंटर, कर्मचारियों की कमी

राजनांदगांव, 13 सितंबर (वार्ता) छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव शहर में बिजली आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों के निराकरण के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की कमी और कॉल सेंटर की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दावा है कि शहर में 65 हजार से अधिक उपभोक्ता होने के बावजूद स्थानीय कॉल सेंटर में तीन टेलीफोन लाइनों को संभालने के लिए एक समय में केवल एक ऑपरेटर तैनात रहता है।

विभागीय आंकड़ों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार राजनांदगांव शहरी संभाग के टाउन-1 और टाउन-2 के अंतर्गत करीब 65 हजार से 70 हजार घरेलू, व्यावसायिक और लघु औद्योगिक उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं से बिजली बिल के रूप में प्रतिमाह औसतन करीब 18 से 22 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का दावा किया गया है।

स्थानीय स्तर पर बिजली गुल होने अथवा अन्य तकनीकी खराबी की शिकायत दर्ज कराने में उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कॉल सेंटर में तीन टेलीफोन लाइनें होने के बावजूद शिफ्ट में एक ऑपरेटर के तैनात रहने की बात सामने आई है। ऑपरेटर को उपभोक्ता का नाम, पता, उपभोक्ता क्रमांक और समस्या दर्ज करने के साथ संबंधित फील्ड टीम अथवा लाइनमैन को इसकी सूचना भी देनी होती है। इस प्रक्रिया के दौरान दूसरे उपभोक्ताओं को फोन लाइन व्यस्त मिलने की शिकायतें हैं।

सूत्रों के अनुसार राजनांदगांव में तकनीकी और मेंटेनेंस से जुड़े लाइनमैन तथा सहायक लाइनमैन के पदों पर लंबे समय से नियमित भर्ती नहीं होने के कारण मैदानी अमले की कमी बनी हुई है। इस दौरान कई अनुभवी कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि उपभोक्ताओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। वर्तमान में फॉल्ट सुधार और रखरखाव के कार्यों में ठेका कर्मचारियों की सेवाएं भी ली जा रही हैं।

यह भी आरोप है कि उपलब्ध मैदानी अमला उपभोक्ताओं की संख्या के अनुपात में पर्याप्त नहीं है तथा फॉल्ट सुधार के लिए जरूरी संसाधन, सुरक्षा उपकरण और वाहनों की उपलब्धता भी सीमित है। इसके कारण कुछ मामलों में बिजली आपूर्ति बहाल करने में अपेक्षाकृत अधिक समय लग रहा है।

विद्युत सेवा संबंधी निर्धारित मानकों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में सामान्य फॉल्ट की शिकायतों का तय समय-सीमा में निराकरण किया जाना होता है। स्थानीय उपभोक्ताओं का आरोप है कि राजनांदगांव में कई बार रात के समय ट्रांसफार्मर, पोल अथवा लाइन में खराबी आने पर सुधार कार्य में कई घंटे लग जाते हैं।

उल्लेखनीय है कि राज्य का ऊर्जा विभाग मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के पास है, जबकि राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह करते हैं। ऐसे में शहर की बिजली शिकायत व्यवस्था, कॉल सेंटर में अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती और मैदानी तकनीकी अमले की संख्या बढ़ाने की मांग उठ रही है।

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