नई दिल्ली | रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक साल पूरा होने पर पाकिस्तान को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि भारत अब आतंकी गतिविधियों को कतई सहन नहीं करेगा। उन्होंने खुलासा किया कि इस अभियान के दौरान भारत को परमाणु हमले तक की धमकियां मिली थीं, लेकिन सरकार ने उन्हें नजरअंदाज कर राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा। राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि सीजफायर या अभियान को रोकना भारत की कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीतिक पसंद थी। भारत उस समय भी लंबी लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार था और आज हमारी सैन्य क्षमता पहले से कहीं अधिक दुरुस्त और घातक हो चुकी है।
पाकिस्तान पर सीधा निशाना साधते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आज दुनिया भारत को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के वैश्विक हब के रूप में जानती है, जबकि पाकिस्तान ‘इंटरनेशनल टेररिज्म’ (दूसरे IT) का केंद्र बन चुका है। उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना ने केवल उन्हीं ठिकानों को निशाना बनाया जिन्होंने देश पर हमला किया था, जबकि पाकिस्तान ने कायरतापूर्ण तरीके से नागरिक इलाकों को निशाना बनाने की कोशिश की। सिंह ने साफ किया कि भारत अब आतंकवाद और उसे पनाह देने वाले देशों के बीच कोई फर्क नहीं करेगा, और जरूरत पड़ने पर सीमा पार जाकर दुश्मन को धूल चटाने का साहस रखता है।
रक्षा मंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक और सकारात्मक पहलू पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस अभियान के बाद वैश्विक स्तर पर भारतीय स्वदेशी हथियारों की मांग और साख बढ़ी है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात लगभग 39,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्शाता है। यह आंकड़ा न केवल भारत की ‘आत्मनिर्भरता’ को सिद्ध करता है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में एक बड़ी ताकत के रूप में भारत के उदय का प्रमाण भी है। भारत अब अपनी मर्जी और अपनी शर्तों पर वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में निर्णायक भूमिका निभा रहा है।

