
नीमच। आदिवासी बहुल क्षेत्रों के विकास को ध्यान में रखते हुए रेल मंत्रालय ने एक अहम फैसला लिया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने करीब 380 किलोमीटर लंबी नीमच-बांसवाड़ा-दाहोद-नंदुरबार नई रेल लाइन के लिए अंतिम सर्वेक्षण और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की मंजूरी दे दी है। यह प्रस्तावित रेल परियोजना नीमच (मध्य प्रदेश), बांसवाड़ा (राजस्थान), दाहोद (गुजरात) और नंदुरबार (महाराष्ट्र) सहित आदिवासी बहुल क्षेत्रों को रेलवे नेटवर्क से जोडऩे की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
रेल मंत्री के अनुसार यह परियोजना क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी। इससे न केवल दूरदराज के इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि व्यापार, उद्योग और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
खनिज संपदा को मिलेगा नया बाजार
बांसवाड़ा क्षेत्र खनिज संपदा से समृद्ध है। यहां मैंगनीज, डोलोमाइट, चूना पत्थर, सोना, तांबा और क्वार्टजाइट जैसे खनिज बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं। रेल लाइन बनने से माल ढुलाई आसान होगी और इन खनिजों की मांग बढऩे की संभावना है। इससे स्थानीय उद्योग और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा
नई रेल लाइन से पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही निर्माण कार्य और बाद में संचालन के दौरान स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
पहली बार बांसवाड़ा को मिलेगी रेल कनेक्टिविटी
रेल मंत्री ने बताया कि बांसवाड़ा अब तक रेलवे नेटवर्क से नहीं जुड़ा था। प्रस्तावित रेल लाइन के जरिए इसे दाहोद से जोड़ा जाएगा, जिससे दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग के लिए एक छोटा और वैकल्पिक रूट भी उपलब्ध हो सकेगा। इस परियोजना से मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के कई शहरों को फायदा मिलेगा, जिनमें लगभग 50 हजार से अधिक आबादी वाला शहादा शहर भी शामिल हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रेल लाइन आदिवासी क्षेत्रों को मुख्यधारा के विकास से जोडऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
