सीहोर। फर्जी मेडिकल डिग्री मामले में पुलिस द्वारा गिरफ्तार बिलकिसगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निलंबित रेडियोग्राफर हीरा सिंह कौशल का नाम स्वास्थ्य विभाग की जिला स्तरीय प्रशिक्षण सूची में शामिल होने से विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं. विभाग उसे निलंबित कर चुका है और वह जेल में है, इसके बावजूद उसे रेडियोग्राफर बताते हुए पदस्थापना स्थल बिलकिसगंज दर्ज किया है.
जानकारी के अनुसार हीरा सिंह कौशल को फर्जी मेडिकल डिग्री तैयार करने और उसके आधार पर सरकारी नियुक्तियों में कथित फर्जीवाड़े के मामले में दमोह पुलिस ने गिरफ्तार किया था. जांच के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित संजीवनी क्लीनिक में कथित फर्जी डिग्रियों के आधार पर लोगों को डॉक्टर के रूप में नौकरी दिलाने का मामला भी सामने आया है. पुलिस जांच में कई कथित फर्जी डॉक्टरों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है. वहीं मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार कार्यालय में भी आरोपी के पंजीयन का रिकॉर्ड नहीं मिलने की जानकारी सामने आई है.
बिलकिसगंज स्वास्थ्य केंद्र पहले भी चर्चा में रहा है. ऐसे में गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर्मचारी का नाम विभागीय प्रशिक्षण सूची में सामने आना रिकॉर्ड अपडेट और व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है.अब देखना है कि विभाग इसे महज लिपिकीय त्रुटि मानता है या रिकॉर्ड तैयार करने में हुई चूक की जिम्मेदारी भी तय करता है.
निलंबन के बाद भी रिकॉर्ड में पदस्थ
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कर्मचारी के खिलाफ विभागीय स्तर पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है और वह जेल में है, तो प्रशिक्षण सूची तैयार करते समय उसकी सेवा स्थिति अपडेट क्यों नहीं की गई. क्या सूची जारी करने से पहले संबंधित कर्मचारियों के वर्तमान पदस्थापन और सेवा रिकॉर्ड का सत्यापन नहीं किया गया. यदि निलंबन की जानकारी विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज थी तो फिर प्रशिक्षण सूची में उसका नाम और पदस्थापना स्थल बिलकिसगंज कैसे दर्ज हो गया.
