क्वेटा, बलूचिस्तान के मस्तुंग जिले के करदिगाप तहसील में पाकिस्तानी सेना की फ्रंटियर कोर (FC) ने एक बार फिर खूनी खेल खेलते हुए रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेना द्वारा की गई भारी गोलाबारी और हवाई हमलों में कई गोले स्थानीय नागरिक अब्दुल जलील सरपराह के घर पर गिरे, जिससे उनकी मां और दो मासूम बच्चियों की मौके पर ही मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल छह साल की एक अन्य बच्ची ने भी क्वेटा के अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिससे इस क्रूर हमले में मरने वालों की कुल संख्या चार हो गई है।
गुस्साए स्थानीय लोगों ने शवों को हाईवे पर रखकर शुरू किया अनिश्चितकालीन धरना, यातायात पूरी तरह ठप
इस अमानवीय सैन्य कार्रवाई के विरोध में आक्रोशित स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों ने मारे गए मासूमों के शवों को क्वेटा-नुश्की हाईवे पर रखकर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिसके कारण मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है। हाल ही में मस्तुंग के खदकोचा इलाके में हुए ड्रोन हमलों और बढ़ते सैन्य अभियानों के कारण आम नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है। मानवाधिकार संगठनों ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि बलूचिस्तान में लगातार निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है और सैन्य गतिविधियों की आड़ में मानवाधिकारों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।
जबरन गायब किए गए युवाओं के शव मिलने से क्षेत्र में तनाव, मानवाधिकार संगठनों ने जताई गंभीर चिंता
इस सैन्य कार्रवाई और बमबारी के बीच स्थानीय समुदायों में सुरक्षा को लेकर भारी दहशत का माहौल है। मानवाधिकार संगठनों ने खुलासा किया है कि हाल ही में मस्तुंग के विभिन्न इलाकों से कई अज्ञात शव बरामद हुए हैं, जिन्हें लेकर यह आशंका जताई जा रही है कि ये उन बलूच युवाओं के शव हैं जिन्हें पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा पहले जबरन अगवा कर लिया गया था। बलूचिस्तान में लगातार हो रहे इन अत्याचारों, गुप्त हिरासत केंद्रों में दी जाने वाली प्रताड़ना और नागरिकों की हत्याओं के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आवाज उठाई जाने लगी है।

