ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब ने पूर्वी-पश्चिमी तेल पाइपलाइन अस्थायी रूप से बंद की

रियाद, 12 सितंबर (वार्ता) सऊदी अरब ने शुक्रवार को ड्रोन हमले के बाद अपनी महत्वपूर्ण पूर्वी-पश्चिमी तेल पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया।

इस दौरान, ईरान समर्थित यमन के हूती लड़ाकों ने लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर स्थित एक रणनीतिक द्वीप पर कब्जा कर लिया है, जिससे जारी क्षेत्रीय युद्ध में एक और मोर्चा खुल गया है। इस्लामी मिलिशिया ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के नौवहन मार्ग के आसपास वर्षों में अपनी सबसे बड़ी क्षेत्रीय बढ़त हासिल कर ली है। हूतियों की यह बढ़त वैश्विक तेल और गैस की कीमतों को और बढ़ाने के ईरान के प्रयासों को मजबूत कर सकती है। इससे अमेरिका पर युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव बढ़ाने की उसकी कोशिशों को बल मिल सकता है।

सऊदी अरब ने कहा कि उसने पिछले दिन हुए ड्रोन हमले के बाद अरब प्रायद्वीप के आर-पार फैली 1,200 किलोमीटर लंबी पूर्वी-पश्चिमी पाइपलाइन को बंद कर दिया है। सऊदी अरब ने इस फैसले को एहतियाती कदम बताया है।

सऊदी विदेश मंत्रालय ने इस हमले के लिए इराक से उड़ाए गए कई ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि हमले में लोग घायल हुए हैं।

सरकारी सऊदी प्रेस एजेंसी में जारी बयान में सऊदी अरब ने कहा कि वह तत्काल जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा, ताकि इराकी सरकार को आवश्यक कदम उठाने का अवसर दिया जा सके। सऊदी अरब ने हालांकि कहा कि वह अपनी संप्रभुता, सुरक्षा, प्रतिष्ठानों और नागरिकों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

इराक सरकार ने हूतियों के हमले की निंदा की है।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि जांच में यह पुष्टि होने के बाद कि हमले में इस्तेमाल किये गये ड्रोन वास्तव में इराक के थे, एक सैन्य कमांडर को औपचारिक रूप से पद से हटा दिया गया है।

बाद में इराक के सूत्रों ने बताया कि ईराक ने एहतियाती कदम के तौर पर ईरान के साथ शलमचेह सीमा चौकी को बंद करने का आदेश दिया है और हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की तलाश के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है।

सऊदी अरब और अमेरिका ने जुलाई में इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर संयुक्त रूप से बमबारी की थी। दोनों देशों ने इन मिलिशिया पर सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया था, जिनकी जिम्मेदारी हूतियों ने ली थी।

गौरतलब है कि 1980 के दशक में निर्मित पूर्वी-पश्चिमी पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही है। यह पाइपलाइन उस समय से सऊदी तेल निर्यात के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है, जब युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाले तेल परिवहन को बाधित कर दिया था।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार, जून की शुरुआत तक सऊदी अरब ने कथित तौर पर पाइपलाइन के पश्चिमी छोर पर स्थित लाल सागर के बंदरगाह के जरिए कच्चे तेल का निर्यात दोगुने से अधिक बढ़ाकर प्रतिदिन 50 लाख बैरल से अधिक कर दिया था।

बाब अल-मंदेब में स्थित छोटे और बंजर ज्वालामुखीय द्वीप मायून, जिसे पेरिम के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन हूतियों के कब्जे की पुष्टि यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और एक हूती अधिकारी ने की है।

दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक सऊदी अरब, ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाये जाने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक कच्चा तेल पहुंचाने के लिए लाल सागर पर अधिक निर्भर हो गया है। करीब 28 किलोमीटर चौड़े बाब अल-मंदेब को बंद करने के हूतियों के प्रयासों ने इस वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करना भी लगातार मुश्किल बना दिया है।

हूती सशस्त्र बलों ने शुक्रवार को जारी एक बयान में तटीय क्षेत्र में अपनी और बढ़त का दावा किया, हालांकि इसमें मायून, बंदरगाह शहर मोखा या बाब अल-मंदेब का विशेष रूप से उल्लेख नहीं किया गया। समूह ने सऊदी अरब के खिलाफ जैसी बढ़ोतरी, वैसी बढ़ोतरी की नीति अपनाने का संकल्प जताया और कहा कि सऊदी जहाजों को छोड़कर सभी कंपनियों के लिए समुद्री नौवहन सुरक्षित है।

इन घटनाक्रमों से तेल बाजारों में चिंता बढ़ गई है। इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमत फिर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गयी, जिससे भविष्य में वाशिंगटन के साथ किसी भी बातचीत में तेहरान को अधिक दबाव बनाने का मौका मिल सकता है।

जुलाई में नाकाबंदी की घोषणा करने के बाद से हूती लाल सागर में सऊदी जहाजों पर हमले कर रहे हैं और सऊदी अरब के भीतर तेल प्रतिष्ठानों को भी निशाना बना रहे हैं। समूह का कहना है कि उसके हमले यमन में हूतियों के नियंत्रण वाले क्षेत्रों की सऊदी अरब की लंबे समय से जारी नाकाबंदी के जवाब में हैं।

एक हूती प्रसारक के अनुसार, गुरुवार को हूतियों द्वारा बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा किये जाने के बाद सऊदी अरब ने मोखा हवाई अड्डे पर हवाई हमला किया। तत्काल किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की रिपोर्टें नहीं है।

यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा कि सऊदी अरब की वायुसेना मोखा पर हूतियों के कब्जे को रोकने में विफल रही, जिससे अधिकारियों को हैरानी हुई। उन्होंने संकेत दिया कि सऊदी अरब को बड़े पैमाने पर हवाई अभियान चलाने के लिए अमेरिका की मंजूरी नहीं मिली थी।

मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं होने के कारण नाम न बताने की शर्त पर अधिकारी ने कहा कि यमन की सेना और सहयोगी मिलिशिया के बीच समन्वय की कमी भी इसके लिए जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति ने हूतियों को बहुमूल्य अवसर दे दिया।

लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के अनुसार, 2023 के अंत में हूतियों द्वारा जहाजों पर हमले शुरू किए जाने के बाद बाब अल-मंदेब के रास्ते होने वाला समुद्री परिवहन करीब 60 प्रतिशत घट गया था। हूतियों ने इन हमलों को गाजा में “फिलिस्तीनियों के साथ एकजुटता” के तौर पर बताया था। इस वर्ष सऊदी अरब द्वारा होर्मुज के विकल्प तलाशने के कारण इस मार्ग पर गतिविधियां बढ़ी थीं, लेकिन हूतियों की नये सिरे से दी गयी धमकियों के बाद जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाला समुद्री परिवहन फिर कम हो गया है।

अब सऊदी अरब को अपने तेल के लिए एक अन्य मार्ग पर विचार करना पड़ रहा है। इसके तहत कच्चे तेल को लाल सागर से उत्तर की ओर भूमध्य सागर तक पहुंचाया जा सकता है, या तो स्वेज नहर के रास्ते या मिस्र के रास्ते एक पाइपलाइन के जरिए। एशिया के ग्राहकों के लिए दोनों मार्ग काफी लंबे हैं।

हूतियों ने इस मार्ग को भी निशाना बनाने की धमकी दी है। उन्होंने अगस्त के अंत में उत्तरी लाल सागर में एक सऊदी जहाज पर हमला किया था।

ईरानी अधिकारियों ने शुक्रवार को सऊदी अरब से हूतियों के कब्जे वाले क्षेत्रों की नाकाबंदी समाप्त करने की मांग की। उन्होंने खुले तौर पर अपने सहयोगी हूतियों का समर्थन किया और सऊदी अरब तथा हूतियों के बीच बातचीत फिर से शुरू करने का आग्रह किया।

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) के एक प्रवक्ता ने बुधवार को कहा कि अमेरिका के साथ भविष्य में होने वाले किसी भी समझौते में यमन को भी शामिल किया जाना चाहिए। इससे यह स्पष्ट होता है कि ईरान हूती मोर्चे को कितना महत्व देता है। यह पहली बार था जब ईरान ने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत में यमन के संघर्ष को भी शामिल किया जाना चाहिए।

सऊदी अरब ने कहा कि उसने लगातार बातचीत के अवसर उपलब्ध कराए हैं और उसका रुख है कि उसे अपनी रक्षा करने का अधिकार है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने गुरुवार को अपने सऊदी समकक्ष से “स्थिरता बहाल करने” के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर बातचीत की।

 

 

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