मथुरा 11 अगस्त (वार्ता) विश्व प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर प्रबंधन ने सनातन परंपरा, सभ्यता और मंदिर की पवित्रता को बनाए रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए शालीन और पारंपरिक पोशाक पहनना अनिवार्य कर दिया गया है, जबकि छोटे और अमर्यादित कपड़े पहनकर आने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस संबंध में प्रबंधन ने मंदिर के प्रवेश द्वारों पर नियम व निर्देशों से संबंधित बोर्ड भी लगा दिए हैं।
मंदिर प्रबंधन द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के अनुसार, महिला व पुरुष श्रद्धालुओं के बिना आस्तीन (स्लीवलेस) कपड़े, शॉर्ट्स, मिनी स्कर्ट, हाफ पैंट और पारदर्शी वस्त्र पहनकर आने पर रोक रहेगी। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे भारतीय संस्कृति के अनुरूप साड़ी, सूट-सलवार, कुर्ता-पायजामा या अन्य पारंपरिक परिधान पहनकर ही ठाकुरजी के दर्शन के लिए आएं। इसके साथ ही मंदिर परिसर के भीतर भक्तिमय माहौल बनाए रखने के उद्देश्य से रील्स बनाने, फोटोग्राफी और सेल्फी लेने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
प्रबंधन का मानना है कि छोटे कपड़े विदेशी सभ्यता को दर्शाते हैं, जो भारतीय परंपरा और सनातनी संस्कृति के अनुकूल नहीं हैं। श्रद्धालु जब मंदिर आएं, तो पूर्ण भक्ति भाव और मर्यादा के साथ दर्शन का आनंद लें।
इस्कॉन मंदिर के जनसंपर्क अधिकारी रविलोचन दास ने बताया कि मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा और मर्यादा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है। प्रवेश द्वार पर लगाए गए बोर्ड्स के माध्यम से श्रद्धालुओं को पहले ही जागरूक किया जा रहा है।
गौरतलब है कि वृंदावन में इस्कॉन से पहले भी दो प्रमुख मंदिरों-प्रसिद्ध श्रीराधादामोदर मंदिर और मथुरा मार्ग स्थित पागल बाबा मंदिर में भी श्रद्धालुओं के छोटे कपड़े पहनकर आने पर रोक लगाई जा चुकी है। इस्कॉन मंदिर के इस निर्णय के बाद धाम के धार्मिक वातावरण को और अधिक व्यवस्थित व अनुशासित बनाने के प्रयासों को बल मिला है।
