
नयी दिल्ली, 11 सितंबर (वार्ता) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि देश के विस्तृत तटीय इलाकों को पर्यावरण, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, टेक्नोलॉजी और मानव विकास के एक मिले-जुले क्षेत्र के तौर पर देखा जाना चाहिए और इसी दृष्टि से इसका प्रबंधन किया जाना चाहिए। डॉ सिंह कहा कि देश की लंबी तटरेखा और विशाल समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र बड़े अवसर प्रदान करते हैं, साथ ही इसके लिए वैज्ञानिक ज्ञान, पर्यावरणीय स्थिरता, सुरक्षा और आर्थिक विकास को मिलाकर एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने की भी आवश्यकता है।
उन्होंने ‘तटीय पर्यावरण, सुरक्षा और स्थिरता (सीसीईएसएस) 2026’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए यह बात कही। यह सम्मेलन अहमदाबाद में गुजरात विश्वविद्यालय के परिसर में आयोजित किया गया है। डॉ सिंह के पास पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री का भी दायित्व है। उन्होंने कहा कि भारत की 11,000-12,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा समुद्री संसाधनों और ‘सागर आधारित अर्थव्यस्था’ के लिए बड़ी संभावनाएं प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि गहरे समुद्र के अन्वेषण और स्वदेशी टेक्नोलॉजी समुद्री संसाधनों की खोज के लिए नए रास्ते खोल रही हैं।