
पांढुरना। सदियों पुरानी चली आ रहीं परंपरा के अनुसार शुक्रवार 11 सितंबर को नगर में विश्व प्रसिद्ध गोटमार मेला मनाया जा रहा है,दोपहर 1:30 बजे के बाद से यह गोटमार मेला पूरे उन्माद पर है,दोनों ही पक्षों की और से हो रहीं पत्थरबाजी में 2:30 बजे तक 484 लोग घायल हो गए है,जिनमें से तीन गंभीर लोगों को नागपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। वहीं इस मेले को देखने हजारों की संख्या में लोगों का हुजूम नदी के दोनों और तथा यहां आसपास की मकानों की छतों खड़े होकर लुफ्त उठाते रहे ।
प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी आज सूर्योदय के पूर्व ही गोटमार स्थल जाम नदी के बिचों-बिच कावले परिवार द्वारा अपनी परंपरा का निर्वाह करते हुए पलाश वृक्ष रूपी झंड़े को पूरे रीति-रिवाजों के साथ गाड़ा गया,तत् पश्चात सर्वप्रथम सैकड़ों धर्म प्रेमियों ने अपने-अपने मन्नतों के अनुरूप गोटमार स्थल पर पहुंचकर झंडे की पूजा-अर्चना की जिसमें नन्हे-मुन्ने बच्चे,महिला,पुरुष,वृध्द सभी का समावेश था। यह सिलसिला सुबह 10.30 बजे तक इसी प्रकार चलते रहा,इस दौरान किसी ने भी एक दुसरे पर पत्थर नहीं फेंके।
गौरतलब हो कि गोटमार मेला,मेला न होकर एक तरह का युद्ध है,इसमें कोई दो या चार लोग,दो या चार घंटे नहीं बल्कि सैकड़ों लोग सुबह से शाम तक प्रशासन के आला अधिकारियों की मौजूदगी में एक-दूसरे पर आमने-सामने से पत्थर मार विपक्षी योद्धाओं को खून से लहूलुहान करते है,इस मेले को पहली बार देखने वाले बहुत अधिक आश्चर्य चकित होते है। धार्मिक भावनाओं से जुड़ा यह मेला दोपहर 2 बजे के बाद से ही पूरे शबाब पर है ।
विभागीय सूत्रों की माने तो दोपहर 2:30 बजे तक दोनों ही पक्ष के 484 लोग घायल हो गए है,वहीं किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए गोटमार स्थल के साथ ही पूरे नगर में 750 पुलिस अधिकारी,कर्मचारी तैनात है। वहीं स्वयं जिला कलेक्टर नीरज वशिष्ठ ,जिला पुलिस अधीक्षक चंद्रप्रकाश परिहार श्री राम मंदिर के पास से मेले की प्रत्येक गतिविधियों पर नजर रखते हुए अधीनस्थ विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहें है।
