न्यूयॉर्क, वैश्विक ऊर्जा बाजार में मध्य पूर्व के हालातों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते प्रत्यक्ष सैन्य संघर्ष के बाद अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ‘ब्रेंट क्रूड’ की कीमत उछलकर 101.21 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है, जो जुलाई के बाद से इस आंकड़े का उच्चतम स्तर है। अमेरिकी सेना द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी टैंकरों को नष्ट किए जाने और जवाबी कार्रवाई के बाद दुनिया के इस सबसे अहम तेल व्यापार मार्ग से आपूर्ति लगभग ठप हो गई है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराने लगा है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के आसार, मालभाड़ा बढ़ने से महंगाई की मार तय
कच्चे तेल के महंगे होने का सीधा असर अब आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ना तय माना जा रहा है। अमेरिका और अन्य प्रमुख बाजारों में ईंधन के दाम आसमान छूने लगे हैं, जहां पेट्रोल 4.22 डॉलर प्रति गैलन और डीजल रिकॉर्ड 5.94 डॉलर प्रति गैलन के स्तर पर पहुंच गया है। चूंकि ट्रकों, मालगाड़ियों और कृषि उपकरणों में डीजल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है, इसलिए ईंधन महंगा होने से फल, सब्जियां, दवाइयां और रोजमर्रा के उपभोक्ता सामानों का परिवहन खर्च तेजी से बढ़ेगा, जिससे हर वस्तु के दाम में भारी उछाल आने की आशंका है।
अर्थशास्त्रियों ने दी चेतावनी, यदि तनाव लंबा खिंचा तो 120 डॉलर तक जा सकते हैं तेल के दाम
मार्केट रिसर्च फर्मों और वित्तीय संस्थाओं जैसे बैंक ऑफ अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि यह सैन्य गतिरोध जारी रहता है और समुद्री मार्ग बंद रहते हैं, तो आने वाले हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतें 110 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। खाड़ी देशों के तेल संयंत्रों को सीधा नुकसान पहुंचने की स्थिति में यह आंकड़ा 150 डॉलर को भी छू सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी का खतरा मंडराने लगा है और तमाम देशों के नीति निर्माताओं की चिंताएं बढ़ गई हैं।

