Apple ने कैसे पाई अपनी पहचान। आइजैक न्यूटन से लेकर एप्पल लोगो का पूरा सफर कैसा था?
मुंबई, आज के समय में Apple का नाम सुनते ही सबसे पहले लोगों के दिमाग में एक कटा हुआ सेब वाला लोगो आता है। वहीं अब यही सिंपल डिजाइन दुनिया के सबसे पहचाने जाने वाले ब्रांड सिंबल्स में शामिल हो गया है। लेकिन क्या आप Apple के उस इतहास के बारे में जानते हैं जिसकी वजह से वो आज इतना बड़ा नाम बना है और इस फेमस ब्रांड का पहला लोगो क्या ऐसा ही दिखता था? बता दें कि कंपनी की शुरुआत में जो डिजाइन इस्तेमाल किया गया था उसमें सेब से ज्यादा महान वैज्ञानिक आइजैक न्यूटन नजर आते थे।
यह कहानी ऐसे समय की है जब स्टीव जॉब्स, स्टीव वोज्नियाक और रोनाल्ड वेन ने 1976 में Apple की नींव रखी थी। वहीं कंपनी को पहचान देने के लिए पहला लोगो बनाने की जिम्मेदारी तीसरे को-फाउंडर रोनाल्ड वेन ने संभाली थी। इसमें दिलचस्प बात यह है कि आज 9 सितंबर को Apple के बड़े लॉन्च इवेंट की चर्चा के बीच कंपनी के इसी पुराने लोगो की कहानी फिर सामने आ गई है।
Apple के पहले Logo में पेड़ के नीचे बैठे थे न्यूटन
Apple कंपनी का रोनाल्ड वेन ने जो पहला लोगो डिजाइन किया था वह आज के Apple लोगो से पूरी तरह अलग था। इसमें आइजैक न्यूटन को एक पेड़ के नीचे बैठकर किताब पढ़ते हुए दिखाया गया था और उनके सिर के ऊपर सेब गिरने वाला था। वहीं इस डिजाइन के चारों ओर एक रिबन बना था जिस पर Apple Computer Co. लिखा था। साथ ही अंग्रेजी कवि विलियम वर्ड्सवर्थ की एक पंक्ति भी शामिल थी। यह पूरा लोगो ब्लैक एंड व्हाइट था और हाथ से तैयार किया गया था। जो देखने में यह किसी पुरानी किताब के कवर या 19वीं सदी के प्रिंट जैसा लगता था।
आखिर न्यूटन को ही क्यों चुना गया?
अपने इस लोगों को चुनने को लेकर रोनाल्ड वेन ने एक इंटरव्यू में बताया था कि इस डिजाइन के पीछे उनका मकसद विज्ञान, ज्ञान और खोज की भावना को दिखाना था। न्यूटन उस समय विज्ञान की दुनिया के सबसे बड़े नामों में शामिल थे और उनके काम ने आधुनिक विज्ञान की दिशा बदलने में बड़ी भूमिका निभाई थी। इसके साथ ही दूसरी तरफ स्टीव जॉब्स कंपनी के नाम में Apple शब्द रखने को लेकर पहले से स्पष्ट थे।
वेन ने Apple नाम और न्यूटन की कहानी को जोड़कर ऐसा लोगो बनाया जिसमें ज्ञान और खोज दोनों का संकेत मिलता था। लेकिन समस्या यह थी कि यह लोगो काफी जटिल था। क्योंकि छोटे आकार में इस्तेमाल करने पर इसकी बारीकियां दिखाई नहीं देती थीं। यही वजह रही कि यह डिजाइन करीब एक साल में ही बदल दिया गया।
कटा हुआ सेब कैसे बना Apple की पहचान?
कहानी के बारे में बताए तो 1977 की शुरुआत में स्टीव जॉब्स ने विज्ञापन एजेंसी Regis McKenna के आर्ट डायरेक्टर Rob Janoff को नया लोगो बनाने की जिम्मेदारी दी थी। उन्हें सिर्फ एक बात कही गई थी लोगो को क्यूट नहीं बनाना है। इसके साथ जानॉफ ने कुछ ही हफ्तों में वह डिजाइन तैयार कर दिया जिसे आज दुनिया Apple के नाम से पहचानती है। इसमें खास बात यह रही कि उन्होंने जॉब्स को सिर्फ एक डिजाइन दिखाया और स्टीव जॉब्स ने उसे बिना किसी बदलाव के तुरंत मंजूर कर दिया था।
वहीं अब सवाल था कि सेब में आखिर कट क्यों लगाया गया था? इसे लेकर सालो तक कई तरह की कहानियां सामने आती रहीं। किसी ने इसे ईव की कहानी से जोड़ा तो किसी ने वैज्ञानिक एलन ट्यूरिंग की मौत से। लेकिन जानॉफ ने इन सभी दावों को खारिज कर दिया था। उनके मुताबिक वजह बेहद साधारण थी जो स्केल है। बिना कट के छोटा Apple लोगो चेरी या टमाटर जैसा दिख सकता था। लेकिन कट लगाने से हर आकार में यह साफ नजर आता था कि वह सेब है।
वहीं दिलचस्प संयोग यह भी था कि bite शब्द सुनने में कंप्यूटर के byte जैसा लगता था। लेकिन जानॉफ के मुताबिक यह जानबूझकर किया गया वर्डप्ले नहीं था। 1977 से लेकर आज तक लोगो का रंग और स्टाइल कई बार बदला गया लेकिन कटा हुआ सेब अपनी मूल पहचान के साथ कायम रहा है। जो साफ तौर पर दिखाता है कि दुनिया जिस Apple लोगो को आज एक नजर में पहचान लेती है उसकी शुरुआत दरअसल न्यूटन की एक जटिल तस्वीर से हुई थी।
वहीं आज के समय में Apple का डिजाइन जितना साधारण है उसके पीछे उतनी ही खास कहानी छीपी है।
