
बैतूल। राष्ट्रीय राजमार्ग-46 के बरेठा घाट खंड में लंबे समय से अटकी परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है और इसकी शुरुआत केवल न्यायालय के आदेश पर निर्भर रह गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस संवेदनशील हिस्से के लिए सभी जरूरी पर्यावरणीय और वैधानिक मंजूरियां हासिल कर ली हैं और अब मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय से स्टे हटने का इंतजार किया जा रहा है।
करीब 20.91 किलोमीटर लंबे इस हिस्से में निर्माण कार्य जैसे ही अनुमति मिलेगी, तुरंत शुरू कर दिया जाएगा। यह खंड केसला और भौंरा रेंज के बीच आता है, जो टाइगर मूवमेंट कॉरिडोर का हिस्सा होने के कारण पहले से ही पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता रहा है। इसी वजह से 1 अप्रैल 2022 को उच्च न्यायालय ने यहां निर्माण पर रोक लगा दी थी।
वर्तमान में बरेठा घाट का रास्ता संकरा, घुमावदार और दुर्घटनाओं के लिहाज से जोखिमभरा बना हुआ है। पिछले तीन वर्षों में यहां 51 सड़क हादसे दर्ज हुए हैं, जिनमें 18 लोगों की मौत और 60 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। भारी वाहनों का दबाव और सीमित दृश्यता इस मार्ग को और खतरनाक बना देती है।
एनएचएआई की प्रस्तावित योजना के तहत इस हिस्से को 4-लेन में विकसित किया जाएगा, जिसमें पुल, अंडरपास, ओवरब्रिज और ब्लैक स्पॉट सुधार जैसे काम शामिल हैं। साथ ही वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एनिमल अंडरपास और ओवरपास बनाए जाएंगे, ताकि उनकी आवाजाही प्रभावित न हो।
634 किलोमीटर लंबा NH-46 प्रदेश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग है, जो ग्वालियर से बैतूल तक उत्तर-दक्षिण दिशा में जुड़ाव देता है और भोपाल-नागपुर कॉरिडोर का अहम हिस्सा है। बरेठा घाट खंड के पूर्ण होने के बाद न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
