नयी दिल्ली, 9 सितंबर (वार्ता) केंद्रीय अप्रत्यक्ष एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने वित्त मंत्रालय में कार्य कर चुके पूर्व प्रशासनिक अधिकारी सुभाष गर्ग के उस विश्लेषण को भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण बताया है जिसमें उन्होंने चालू वित्त वर्ष के माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की वसूली की वृद्धि के सरकार के आंकड़ों पर सवाल उठाये हैं।
श्री गर्ग ने एक लेख में कहा है कि दो लाख करोड़ रुपये के सकल जीएसटी संग्रह के आधार पर सरकार ने अगस्त की वसूली में वर्ष 14.8 प्रतिशत और अप्रैल से अगस्त के पांच महीनों में 11 प्रतिशत की वृद्धि का दावा किया है। उन्होंने लिखा है, ” हालांकि, सरकार ने इसमें एक चाल चली है। वर्ष 2025-26 का जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर (जीएसटी उपकर) चुपचाप इसमें से हटा दिया गया।” उनका तर्क है कि यदि उसे शामिल किया जाए, तो पांच महीनों में सकल जीएसटी वृद्धि केवल 4.08 प्रतिशत और शुद्ध जीएसटी वृद्धि 1.30 प्रतिशत रह जाती है, जो बेहद खराब प्रदर्शन है।”
श्री गर्ग के इस तर्क के संदर्भ में सीबीईसी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ” …. दो अलग-अलग कर आधारों से आंकड़ों को चुन-चुनकर प्रस्तुत करने का कोई भी प्रयास पूरी तरह भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण है। निष्पक्ष विश्लेषण में समान आधार वाले आंकड़ों की तुलना की जानी चाहिए, न कि हमारे नागरिकों को दो मौलिक रूप से अलग-अलग आंकड़ों की तुलना करके गुमराह किया जाना चाहिए।”
सीबीईसी ने स्पष्ट किया है कि जीएसटी परिषद ने 22 सितंबर 2025 से तंबाकू और उससे संबंधित उत्पादों को छोड़कर सभी वस्तुओं पर क्षतिपूर्ति उपकर (राजस्व क्षतिपूर्ति उपकर ) समाप्त करने का निर्णय लिया था। तंबाकू और उससे संबंधित उत्पादों पर भी उपकर एक फरवरी 2026 से हटा दिया गया। इसलिए, उक्त अवधि के बाद कोई उपकर संग्रह नहीं हुआ।
अप्रत्यक्ष करों की शीर्ष एजेंसी ने कहा है, “उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए, नवंबर 2025 से, जो जीएसटी दरों के युक्तिकरण के बाद की पहली कर अवधि थी, सार्वजनिक रूप से जारी किए गए जीएसटी राजस्व के आंकड़ों में क्षतिपूर्ति उपकर को एक अलग तालिका में स्पष्ट रूप से दिखाया गया और वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि की गणना संबंधित अवधियों के सीजीएसटी, एसजीएसटी और आईजीएसटी से बने कर आधार पर की गई। इस संबंध में पर्याप्त जानकारी देने के लिए एक फुटनोट भी प्रकाशित किया गया था।
सीबीईसी ने कहा है कि वृद्धि दर तभी सार्थक होती है जब उसकी गणना तुलनीय आधार पर की जाए, अर्थात तुलना के दोनों पक्षों में समान प्रकार के कर और उपकर शामिल हों। अन्यथा यह सेब और संतरे की तुलना करने जैसा है। वृद्धि दर का उद्देश्य यह बताना है कि कर आधार में किस प्रकार बदलाव आया है। महीने-दर-महीने सार्वजनिक किए जाने वाले जीएसटी राजस्व के आंकड़े, पूरी जानकारी के साथ, जीएसटी राजस्व के प्रदर्शन की सही तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।
जब कोई कर और उपकर कानून के तहत समाप्त हो चुका हो, तब उसे कर आधार में बनाए रखना वास्तव में किसी दूसरी चीज को मापना होगा। यह न तो अंकगणितीय रूप से सही है और न ही तार्किक रूप से इसका कोई औचित्य है।
