गुना में यूजीसी के विरोध में सवर्ण समाज की हुंकार

गुना। उच्च शिक्षा में समानता, सामाजिक समरसता और यूजीसी के नए नियमों पर पुनर्विचार की मांग को लेकर गुना की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। ‘सवर्ण समाज संघर्ष मोर्चा’ के तत्वावधान में आयोजित यह आक्रोश रैली सवर्ण समाज का अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की नीति अपनाने का आह्वान करते हुए यूजीसी के नए नियमों और एट्रोसिटी एक्ट को सवर्णों के साथ खुला अन्याय करार दिया।

आक्रोश रैली की शुरुआत ऐतिहासिक शास्त्री पार्क से हुई, जहां विरोध का बेहद भावुक और आक्रामक रूप देखने को मिला। यूजीसी के विरोध में युवाओं के साथ-साथ एक 80 वर्षीय बुजुर्ग ने भी सार्वजनिक रूप से अपना मुंडन कराया। इसके बाद आंदोलनकारियों ने नेताओं की सांकेतिक अर्थी निकाली और दाह संस्कार कर अपना कड़ा गुस्सा जाहिर किया। शास्त्री पार्क से शुरू हुआ यह जनसैलाब कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचा। वहां हजारों की संख्या में मौजूद लोगों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और तत्पश्चात कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

‘याचना नहीं अब रण होगा’ नारों से गूंजीं सड़कें

आंदोलनकारियों के हाथों में “यूजीसी वापस लो”, “याचना नहीं अब रण होगा”, “काले कानून को वापस लो” और “जाति नहीं गरीबी देखो” जैसी तख्तियां थीं। रैली के दौरान “गालों पर चांटे खाने से आजादी नहीं मिलती, दुश्मन के सीने पर गोलियां चलानी पड़ती हैं” जैसे उग्र नारों ने माहौल को और अधिक गर्मा दिया। इस महाआंदोलन में हर वर्ग की भागीदारी देखी गई। कई सेवानिवृत्त अधिकारी, कर्मचारी, कथा वाचक और भारी संख्या में आम नागरिक शामिल हुए। विशेष रूप से महिलाओं की अभूतपूर्व मौजूदगी रही, जिन्होंने आगे आकर समानता के अधिकार की पुरजोर आवाज उठाई। रैली में कुछ युवा छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्र लेकर भी पहुंचे थे।

सपाक्स अध्यक्ष वीणा राणेकर बोलीं-सवर्ण छात्रों के साथ सौतेला व्यवहार

प्रदर्शन में विशेष रूप से शामिल हुईं ‘सपाक्स’ की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी वीणा राणेकर ने मंच से सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यूजीसी के नए नियम सवर्ण समाज के होनहार छात्र-छात्राओं के साथ सरासर सौतेला व्यवहार हैं। रैली में मौजूद वक्ताओं ने तीखा तंज कसते हुए कहा “अगर सरकार 90 प्रतिशत अंक लाने वालों को पीछे धकेलकर 0 प्रतिशत अंक लाने वालों को डॉक्टर बनाती है, तो देश के नेताओं और मंत्रियों को चाहिए कि वे अपना इलाज भी इन्हीं डॉक्टरों से कराएं। ठीक उसी तरह 0 प्रतिशत अंक लाकर इंजीनियर बनने वालों से ही अपने घर बनवाएं।”

‘बंटोगे तो कटोगे’ नारे पर तंज और एट्रोसिटी एक्ट में संशोधन की मांग

नेताओं द्वारा हाल ही में दिए गए ‘बंटोगे तो कटोगे’ के नारे पर तंज कसते हुए सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार खुद देश को जातियों में बांटने का काम कर रही है। उन्होंने मांग की कि आरक्षण का आधार जाति नहीं बल्कि आर्थिक स्थिति होना चाहिए। इसके साथ ही वक्ताओं ने दावा किया कि एट्रोसिटी एक्ट के कारण देश में बिना आरोप सिद्ध हुए लगभग 70 हजार लोग जेलों में बंद हैं, इसलिए इस कानून में तुरंत संशोधन किया जाना चाहिए।

Next Post

लाल से नीले गमछे की ओर बढ़े सपाई

Wed Sep 9 , 2026
दिल्ली डायरी  प्रवेश कुमार मिश्र  उत्तर प्रदेश की राजनीति में रंगों का यह नया बदलाव सिर्फ पहनावे का नहीं है बल्कि यह सत्ता प्राप्ति के लिए एक नई, गहरी व सोची-समझी रणनीतिक बिसात का प्रतीक है. सपाइयों का लाल से नीले गमछे की तरफ बढ़ना महज एक सतही कदम नहीं […]

You May Like

मनोरंजन