
नई दिल्ली,23 अप्रैल.
पहलगाम में निहत्थे पर्यटकों पर हुए हमले के बाद जिस तरह से केन्द्र सरकार सख्त रूख के साथ आगे बढ़ रही है उससे साफ है कि हमले का जवाब देने में देर नहीं लगेगी.
सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विदेश यात्रा को बीच में छोड़कर वापस आना, गृहमंत्री अमित शाह का घटनास्थल का दौरा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा तीनों सेनाओं व सीडीएस के साथ घंटों बैठक करना, विदेश मंत्री जयशंकर के नेतृत्व में लगातार बैठक होना, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को तत्काल विदेश यात्रा से वापस बुलाया जाना और अंत में ढाई घंटे तक चली सीसीएस की बैठक भविष्य की रणनीति को समझने के लिए काफी है.
सूत्र बता रहे हैं कि आतंकवादी घटना के बाद से ही दिल्ली से लेकर जम्मू-कश्मीर तक हलचल बढ़ गई है. सबसे पहले आंतरिक सुरक्षा को चाक-चौबंद रखने के लिए गृह मंत्रालय के आलाधिकारी पिछले रात से ही देश के सभी राज्यों के गृह विभाग से संपर्क में हैं. इसी तरह रक्षा मंत्री भी पिछले रात से ही तीनों सेनाध्यक्षों और सभी सीमावर्ती इलाकों के उच्च पदस्थ सैन्य अधिकारियों से बहुस्तरीय चर्चा करते रहे हैं.
सूत्र बता रहे हैं कि बंगलादेश, नेपाल और उत्तरपूर्व के राज्यों से सटे चीनी सीमा पर चौकसी बढ़ाई गई है. राजस्थान और गुजरात की सीमाओं पर भी आंतरिक अलर्ट जारी किया गया है. रेलवे व नागरिक उड्डयन मंत्रालय भी पर्यटकों को वापसी कराने के दिशा में लगातार जुटा है. इतना ही नहीं जरूर पड़ने पर सीमावर्ती इलाकों तक सैनिकों की आवाजाही को सुगमता से सुनिश्चित करने के लिए रेलवे मंत्रालय ने सभी विकल्पों पर औपचारिक विमर्श कर तैयारी पर आधारित अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय भेज दी है.
इसके अलावा आपात स्थिति से निपटने के लिए वित्त विभाग की तैयारियों पर केंद्रित रिपोर्ट भी प्रधानमंत्री कार्यालय दोपहर तक भेजी जा चुकी थी. सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई सीसीए की अहम बैठक में आतंकवादी संगठनों व उनके पोषकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है. हालांकि आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर बहुत सारी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया गया है लेकिन सूत्रों की मानें तो इस घटना के बाद प्रधानमंत्री का रूख बहुत ही सख्त हो गया है. जीरो टॉलरेंस की अपनी वचनबद्धता को अमली जामा पहनाने में सरकार इस बार कोई कोर कसर छोड़ने को तैयार नहीं दिख रही है.
सूत्र बता रहे हैं कि सरकार प्रतिक्रियावादी नीति के साथ-साथ कुटनीतिक रणनीति के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है. क्योंकि किसी भी प्रतिक्रिया के पहले पाकिस्तान के पीछे खड़े चीनी रूख पर भी नजर रखी गई है. अमेरिका व रूस समेत विश्व के तमाम देशों द्वारा इस घटना पर दिए प्रतिक्रिया का भी बहुस्तरीय दृष्टि से आंकलन किया गया है. इतना ही नहीं जिस तरह से पाकिस्तान द्वारा सीमावर्ती इलाकों में हलचल बढ़ाई गई है उसके पीछे की मंशा की भी बहुस्तरीय समीक्षा की गई है. कहा जा रहा है कि एक दो दिन के अंदर विपक्षी दलों के नेताओं के साथ भी सरकार मौजूदा हालात पर चर्चा करेगी. बहरहाल, जिस तरह से पिछले रात से लगातार बैठकों का दौर चल रहा है उससे साफ है कि जल्द ही कुछ बड़ा होने वाला है.
