नई दिल्ली, भारत के टेलीकॉम और स्पेस सेक्टर में एक ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव के तहत, कमर्शियल सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के मार्ग में आ रही सभी प्रशासनिक बाधाएं दूर हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतर-मंत्रालयी सचिवों के एक उच्चस्तरीय समूह ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर दी गई सिफारिशों को आधिकारिक तौर पर मंजूरी प्रदान कर दी है, जिसके बाद अब इस अंतिम प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट की आगामी बैठक में स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
एलन मस्क की स्टारलिंक और अन्य कंपनियों को बड़ी राहत, घरेलू कंपनियों की मांग खारिज
प्रशासनिक आधार पर स्पेक्ट्रम आवंटन के इस फैसले को एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और व्यावसायिक जीत माना जा रहा है, जो लंबे समय से इसी मॉडल की वकालत कर रही थी। इसके विपरीत, रिलायंस जियो और भारती एयरटेल जैसी प्रमुख घरेलू टेलीकॉम कंपनियां पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा के नाम पर स्पेक्ट्रम की खुली नीलामी कराने की जोरदार मांग कर रही थीं, जिसे पैनल ने वैश्विक मानकों और तर्कों के आधार पर स्वीकार नहीं किया।
लाइसेंस प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2026 के अंत तक सेवाएं शुरू होने की उम्मीद
Starlink, Eutelsat OneWeb और Reliance Jio जैसी प्रमुख वैश्विक व घरेलू कंपनियों के पास पहले से ही GMPCS (ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट) का कमर्शियल लाइसेंस मौजूद है। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि कैबिनेट की मुहर लगते ही और सुरक्षा संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद, वर्ष 2026 के मध्य या अंतिम तिमाहियों तक भारत के दूरदराज के इलाकों में भी हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं आधिकारिक रूप से लाइव हो जाएंगी।

