
जबलपुर। याचिका के साथ पेश किये गये दस्तावेजों पर याचिकाकर्ता किस मकसद से भरोसा कर रहा है, इसका उल्लेख आवेदन में नही किया गया था। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल ने पेश किये गये दस्तावेजों पर विचार करने से इंकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि किसानों को पानी सप्लाई में दिक्कत है तो वह स्वयं या याचिकाकर्ता के माध्यम से याचिका दायर कर सकते हैं।
हरदा निवासी राम शंकर अंजाने की तरफ से साल 2025 में याचिका दायर की गयी थी। जिसमें कहा गया था कि हरदा के ग्राम उदा के टेल एरिया में तवा नदी की केनाल से पानी की सप्लाई नहीं होने से किसानों की फसल बर्बाद हो रही है। याचिका में राहत चाही गयी थी कि अनावेदकों को पानी सप्लाई के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये जाये।
याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया कि याचिका के साथ साल 2024 में दिये गये अभ्यावेदन की कापी लगाई गयी है। दो साल का समय गुजर जाने के बावजूद भी याचिका पहली बार सुनवाई में आई है। इस दौरान तीन-चार फसल के मौसम गुजर गये हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से दो सौ पन्ने के दस्तावेज को रिकॉर्ड में लेने के लिए आवेदन किया गया है। दस्तावेज पर किस मकसद से याचिकाकर्ता भरोसा कर रहा है, इस आवेदन में कोई उल्लेख नही है। युगलपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा है कि किसानों को अभी भी पानी की दिक्कत है तो वह स्वयं या याचिकाकर्ता के माध्यम से याचिका दायर करने स्वतंत्र हैं।
