नई दिल्ली। सहारा समूह की चार सहकारी समितियों के पात्र जमाकर्ताओं को राहत देने की प्रक्रिया फिर शुरू हो गई है। केंद्रीय सहकारी समितियों के पंजीयक (सीआरसीएस) के माध्यम से अब तक 41,56,711 जमाकर्ताओं के आधार से जुड़े बैंक खातों में 9,267 करोड़ रुपये की राशि सीधे वापस की जा चुकी है। वहीं, करीब 20 लाख आवेदन अभी प्रसंस्करण के लिए लंबित हैं। सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल के पुनः बहाल होने के बाद इन आवेदनों के सत्यापन और रिफंड की प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी गई है।
यह पूरी व्यवस्था प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ विजन तथा केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय द्वारा सहकारी समितियों के सदस्यों के हितों की रक्षा और सहकारी क्षेत्र में जनता का विश्वास मजबूत करने के प्रयासों के तहत संचालित की जा रही है। यह प्रक्रिया 29 मार्च 2023 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा डब्ल्यू.पी. संख्या 191/2022 में दिए गए आदेश के अनुरूप आगे बढ़ाई जा रही है।
नवंबर 2025 में बाधित हुआ था कामकाज
नवंबर 2025 में सहारा सहकारी समितियों का कामकाज प्रभावित हुआ था। सहारा समितियों से असंबद्ध कुछ मामलों के चलते उनके परिसरों को सील किए जाने के अलावा समितियों को हार्डवेयर और वार्षिक रखरखाव अनुबंध (एएमसी) के बकाया, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और लाइसेंस के नवीनीकरण, मानव संसाधन तथा अन्य प्रशासनिक समस्याओं का सामना करना पड़ा। इसके चलते रिफंड दावों के सत्यापन और प्रसंस्करण के लिए जरूरी प्रणालियों का संचालन बाधित हुआ।
सहकारिता मंत्रालय और सीआरसीएस ने संबंधित हितधारकों, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारी और संबंधित प्राधिकरण भी शामिल हैं, के साथ लगातार समन्वय कर इन प्रशासनिक, वित्तीय, तकनीकी और परिचालन बाधाओं को दूर करने की दिशा में काम किया। इसके बाद पोर्टल और उससे जुड़ी सत्यापन प्रणालियों को फिर से चालू किया जा सका।
चार सहकारी समितियों के जमाकर्ताओं को मिलेगा रिफंड
पुनर्बहाली के बाद सहारा समूह की चार सहकारी समितियों के वास्तविक जमाकर्ताओं की वैध देय राशि के प्रसंस्करण की प्रक्रिया फिर शुरू हो गई है। इनमें सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, लखनऊ; सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी लिमिटेड, भोपाल; हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, कोलकाता; और स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, हैदराबाद शामिल हैं।
पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और कागज-रहित
सरकार ने 18 जुलाई 2023 को सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल शुरू किया था। इसके जरिए जमाकर्ता बिना भौतिक कागजी कार्रवाई के ऑनलाइन रिफंड का दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। पूरी प्रक्रिया डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन सत्यापन और निर्धारित दस्तावेजों की जांच पर आधारित है।
दावों की जांच के दौरान आधार ई-केवाईसी के साथ संबंधित समितियों द्वारा उपलब्ध कराए गए जमाकर्ता, सदस्यता और खाते से जुड़े विवरणों का मिलान किया जाता है। जमा प्रमाण-पत्र, रसीद और अन्य निर्धारित दस्तावेजों की जांच सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत स्थापित निगरानी व्यवस्था और स्वीकृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार की जाती है। सत्यापन सफल होने पर पात्र रिफंड राशि सीधे जमाकर्ता के आधार से जुड़े बैंक खाते में भेजी जाती है।
मंत्रालय और सीआरसीएस ने आईटी अवसंरचना मजबूत करने, जरूरी सिस्टम और लाइसेंस नवीनीकृत करने, परिचालन संबंधी अड़चनें दूर करने तथा मानव संसाधन और प्रशासनिक समस्याओं के समाधान के लिए समन्वित कदम उठाए हैं।
जमाकर्ताओं से कहा गया है कि वे नया दावा केवल आधिकारिक सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल के माध्यम से ही प्रस्तुत करें। पहले से प्रस्तुत दावे में किसी त्रुटि के सुधार के लिए सूचना मिलने पर निर्धारित पुनः प्रस्तुतीकरण पोर्टल का ही इस्तेमाल करें। निर्धारित प्रक्रिया और दस्तावेजों का पालन करने से दावों के समयबद्ध सत्यापन में मदद मिलेगी और जमाकर्ता अनधिकृत माध्यमों तथा भ्रामक दावों से सुरक्षित रहेंगे।
