मझगवां क्षेत्र में फिर मिला अति गंभीर कुपोषित बालक

सतना : जिले का मझगवां क्षेत्र पिछले कई वर्षों से कुपोषण का दंश झेलने के लिए मजबूर है. यहां न सिर्फ समय-समय पर कुपोषित बच्चे सामने आते रहते हैं बल्कि उनमें से कई काल के गाल में भी समा चुके हैं. हर नई घटना के बाद प्रशासन कुछ समय के लिए जागता है. मैदानी स्तर पर गहन निगरानी और निरंतरता बनाए रखने का दावा भी किया जाता है. लेकिन होता यही है कि कुछ समय के बाद ही गंभीर कुपोषण का एक नया मामला सामने आ जाता है.जिले के मझगवां विकासखण्ड के कानपुर गांव का निवासी तकरीबन 2 वर्ष का बालक पिछले कुछ दिनों से उल्टी-दस्त की बीमारी से पीडि़त था.

इसकी जानकारी जब वहां की आंगनबाड़ी कार्यकत्र्ता को मिली तो वे उसे देखने के लिए पहुंच गईं. बालक की हालत को देखते हुए फौरन अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई. जिसके चलते दादी उसे लेकर 3 सितंबर को मझगवां स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची. जहां पर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. रुपेश सोनी ने जब बालक की हालत देखी तो उसे फौरन ही पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करते हुए उपचार शुरु किया. बालक का वजह मात्र 5.6 किलो निकला और उसकी हालत अति गंभीर कुपोषण की श्रेणी की पाई गई. बीएमओ डॉ. सोनी के अनुसार हलांकि बालक अति गंभीर कुपोषित है, लेकिन इसके बावजूद भी जारी उपचार के चलते उसकी स्थिति सुधर रही है.

यदि रिकवरी रेट ऐसा ही रहा तो कुछ दिनों बाद ही बालक स्वास्थ्य हो जाएगा. पारिवारिक स्थिति भी दयनीय बीमएमओ मझगवां डॉ. सोनी ने बताया कि उक्त बालक इससे पहले अप्रैल महीने में भी सीएचसी में लाया गया था. 14 दिन तक पोषण पुनर्वास केंद्र में रखते हुए उपचार के बाद वह स्वस्थ्य होकर वापस घर लौट गया था. लेकिन बालक की देखभाल तब बुरी तरह प्रभावित होने लगी जब तकरीबन 25 दिन पहले उसकी मां उसे छोडक़र कहीं चली गई. जिसके बाद से दादी ही जैसे-तैसे बालक की देखरेख कर रही है. गौरतलब है कि 5 महीने पहले जब उक्त बालक को कुपोषित पाया गया था, उसी दौरान सुरांगी क्षेत्र में गंभीर कुपोषित 2 जुड़वां बच्चों में से एक बालिका की मौत हो गई थी.
वजन 240 ग्राम बढ़ा
जब बालक को सीएचसी में लाया गया था तो उसका वजन मात्र 5.6 किलो था. जबकि 2 साल के बच्चे का सामान्य औसत वजन 11-14 किलो के बीच होना चाहिए. लेकिन 3 दिन के उपचार के चलते ही उसके वजन में 240 ग्राम की बढ़ोत्तरी देखने को मिली है. जिससे उत्साहित स्वास्थ्य अमला बच्चे के शीघ्र स्वस्थ्य हो जाने का दावा करने लगा है. लेकिन सवाल घूम-फिर कर फिर वहीं पहुंच जाता है कि स्वस्थ्य होने के बाद बच्चों का फॉलोअप, निगरानी और पुनर्वास की व्यवस्था कितने प्रभावी ढंग से कार्य करेगी

Next Post

अंधविश्वास का डंकः सांप से ज्यादा जहरीली तांत्रिक की नीयत!

Tue Sep 8 , 2026
इंदौर: खजराना क्षेत्र में खुद को दरगाह का बाबा बताने वाले ठग ने परिवार की जानकारी हासिल करने के बाद महिला के छोटे बेटे को सांप के काटने का डर दिखाकर 31 हजार रुपए ठग लिए. आरोपी ने पहले पूजा के लिए 6 हजार और बाद में 25 हजार रुपए […]

You May Like