
अनूपपुर, जिले में आपराधिक और अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगता नजर नहीं आ रहा है। पशु क्रूरता, गांजा तस्करी, नशीली दवाओं की खेप और जुआ फड़ों के संचालन जैसी गतिविधियां पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ थाना क्षेत्रों में छोटी-मोटी कार्रवाई तक सीमित रहकर महज कागजी खानापूर्ति की जा रही है, जबकि बड़े स्तर पर संचालित कथित अवैध कारोबार के खिलाफ अपेक्षित प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। सबसे अधिक सवाल गांजा तस्करी के नेटवर्क और पुलिस की निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहे हैं। स्थानीय चर्चा के मुताबिक ओडिशा से छत्तीसगढ़ के रास्ते गांजे की खेप अनूपपुर जिले में पहुंचती है और यहां से शहडोल, सतना, रीवा, जबलपुर, सीधी, सिंगरौली सहित अन्य जिलों तक सप्लाई किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस स्तर से किया जाना बाकी है।
2023 में 1.7 टन से अधिक गांजा जब्त
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में पुलिस ने 1,716.191 किलो गांजा जब्त किया था। वहीं वर्ष 2024 में 136.294 किलो गांजा जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। वर्ष 2022 में भी करीब एक टन गांजा जब्त किए जाने का दावा किया गया था। इन आंकड़ों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 19 मई के बाद जिले में गांजा तस्करी के खिलाफ कितनी कार्रवाई हुई? कितनी मात्रा में गांजा जब्त किया गया, कितने आरोपी गिरफ्तार हुए और कितने वाहनों को जब्त किया गया। इन तमाम बिंदुओं पर पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
जैतहरी से करनपठार तक निगरानी पर सवाल
बताया जाता है कि गांजे की खेप जिले के जैतहरी, भालूमाड़ा, कोतमा, रामनगर, राजेन्द्रग्राम और करनपठार सहित अन्य पुलिस चौकियों से होकर आगे निकलने की चर्चा है। यदि इन मार्गों का इस्तेमाल तस्करी के लिए किया जा रहा है तो पुलिस की जांच और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सवाल यह भी है कि पुलिस के पास तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त सूचना तंत्र नहीं है या फिर उपलब्ध सूचनाओं पर अपेक्षित गंभीरता से कार्रवाई नहीं हो रही है। तस्करी के नेटवर्क को केवल वाहन और माल की जब्ती तक सीमित रखने के बजाय इसके पीछे सक्रिय लोगों और पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की जरूरत महसूस की जा रही है।
ओडिशा से अनूपपुर और फिर दूसरे जिलों तक सप्लाई का दावा
जानकारी के अनुसार ओडिशा से छत्तीसगढ़ के रास्ते गांजा अनूपपुर पहुंचाए जाने की बात सामने आती रही है। इसके बाद कथित तौर पर इसे प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता है। यदि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है तो तस्करी के संभावित मार्गों, वाहनों, आरोपियों और आर्थिक नेटवर्क की पहचान कर कार्रवाई करना पुलिस के सामने बड़ी चुनौती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल छोटे मामलों में कार्रवाई करने के बजाय बड़े नेटवर्क को चिन्हित कर उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। ऐसे में 19 मई के बाद गांजा तस्करी के खिलाफ हुई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक करना पुलिस के लिए स्थिति स्पष्ट करने का महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
पशु तस्करी पर भी उठ रहे सवाल
जिले में पशु क्रूरता और अवैध पशु परिवहन के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जैतहरी थाना क्षेत्र में हाल ही में पशु तस्करों के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद कोतमा, रामनगर और फुनगा चौकी क्षेत्र में भी इसी तरह की सख्ती की उम्मीद जताई गई थी। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि इन क्षेत्रों में कथित पशु तस्करी के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि कोतमा और रामनगर क्षेत्र पशु तस्करी के प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
जैतहरी की कार्रवाई के बाद बढ़ी थी उम्मीद
जैतहरी थाना क्षेत्र में पशु तस्करों के खिलाफ हुई कार्रवाई को प्रभावी कार्रवाई के रूप में देखा गया। इसके बाद लोगों को उम्मीद थी कि कोतमा, रामनगर सहित अन्य थाना क्षेत्रों में भी अवैध पशु परिवहन और तस्करी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा। हालांकि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई की कमी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि कार्रवाई में असमानता के कारण तस्करों के हौसले बढ़ सकते हैं। कार्रवाई के दौरान पत्रकारों को निशाना बनाए जाने और पुलिस पर दबाव बनाए जाने की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं, जिनकी पुष्टि संबंधित अधिकारियों से किया जाना आवश्यक है।
बड़े नेटवर्क पर कार्रवाई की जरूरत
जिले में गांजा तस्करी, पशु तस्करी, नशीली दवाओं और जुआ जैसी अवैध गतिविधियों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में पुलिस के सामने चुनौती केवल मामले दर्ज करने और छोटी जब्तियों तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि अवैध कारोबार के पीछे सक्रिय बड़े नेटवर्क तक पहुंचने की है। स्थानीय लोगों की मांग है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी थाना स्तर पर होने वाली कार्रवाई की नियमित समीक्षा करें और जहां सूचना उपलब्ध हो, वहां निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें। खासकर गांजा तस्करी के मामले में 19 मई के बाद की कार्रवाई, जब्ती, गिरफ्तारी और जब्त वाहनों का विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक होने से कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं।
