
उज्जैन, श्रावण-भादौ मास की छठी और अंतिम राजसी (शाही) सवारी सोमवार को अत्यंत धूमधाम और भव्यता के साथ निकाली गई। राजाधिराज भगवान महाकाल के चंद्रमोलेश्वर, मनमहेश सहित छह स्वरूपों के अलौकिक दर्शन हुए।
पालकी श्री महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर पारंपरिक मार्गों से रामघाट पहुंची, जहां शिप्रा नदी में विधि-विधान से जलाभिषेक और पूजन हुआ।
सवारी में 70 से अधिक भजन मंडलियां, महाकाल मंदिर बैंड, पारंपरिक नर्तक और पुलिस बैंड शामिल हुए, जिससे पूरा शहर जय महाकाल के जयघोष से गूंज उठा।
*सवारी के प्रमुख आकर्षण*
– सिंहस्थ महाकुंभ थीम पर आधारित आयोजन
– मार्ग पर 1 लाख वर्गफीट से अधिक क्षेत्र में विशाल रंगोली
– संगम ईशा फाउंडेशन और नादयोग की आध्यात्मिक प्रस्तुति
– लाइव चित्रकला और ऑडियो-विजुअल माध्यम से सावन पर डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन
– 5 बड़े बैंड, प्रत्येक में 250 से अधिक सदस्य
– 15 ड्रोन से 500 किलो से अधिक पुष्पवर्षा, रामघाट और शहनाई द्वार सहित
– युवा दल की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
