
ग्वालियर। परिवहन विभाग की अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन हैं, लेकिन ग्वालियर आरटीओ में काम कराने के लिए बिचौलियों पर निर्भरता की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि निर्धारित सरकारी शुल्क के अलावा ‘सुविधा’ के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगी जाती है। सवाल यह है कि जब आवेदन और शुल्क जमा करने की सुविधा ऑनलाइन है तो आम आदमी को बिचौलिए की जरूरत क्यों पड़ रही है?
प्राप्त जानकारी के अनुसार लर्निंग लाइसेंस की सरकारी फीस 425 रुपए और परमानेंट लाइसेंस की करीब 1074 रुपए बताई गई है। शिकायत है कि परमानेंट लाइसेंस के लिए बिचौलिया करीब 2700 रुपए मांगता है।
नवभारत प्रतिनिधि से अपनी व्यथा साझा करते हुए एक शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे अपनी दो पहिया वाहन आरसी का रिनुअल कराना था, जब वह आरटीओ कार्यालय गया तो उसे कहा गया कि आरटीओ कार्यालय के नीचे जो लोग बैठे हैं उनसे संपर्क करें। वहां दो पहिया वाहन की पांच साल की आरसी रिन्यूअल के लिए करीब 5000 रुपए लेने की बात सामने आई है, जबकि आवेदक के अनुसार करीब 2000 रुपए ग्रीन टैक्स , एक हजार रुपए रिनुअल फीस , प्लास्टिक कार्ड फीस दौ सौ रुपए ,तिरेसठ रुपए सर्विस शुल्क व अन्य टैक्स बारह रुपए सहित कुल तीन हजार दौ सौ पिछेतर रुपए फीस की रसीद बनती है। आवेदक की मजबूरी थी कि उसे अपनी आरसी का रिन्यूअल कराना था वरना पेनल्टी के साथ-साथ अन्य परेशानी भी खड़ी हो सकती थी।
एक अन्य प्रकरण में चार पहिया वाहन के मामले में बिचौलियों द्वारा 12 से 30 हजार रुपए तक मांगने का आरोप है, जबकि सरकारी रसीद करीब 10,500 रुपए की बताई गई है। हालांकि वाहन की श्रेणी और प्रक्रिया के अनुसार सरकारी शुल्क अलग हो सकता है, इसलिए वास्तविक राशि की पुष्टि विभागीय रिकॉर्ड से होना जरूरी है।
*‘पैसा हर जगह देना पड़ता है’*
नाम न छापने की शर्त पर बिचौलिए ने दावा किया कि आरटीओ की वेबसाइट कई बार काम नहीं करती और कार्यालय में वाई-फाई की सुविधा भी नहीं है। उनका कहना था, ‘हम जो लेते हैं, उसमे अन्य खर्च भी शामिल है उसका एक हिस्सा ऊपर भी देना पड़ता है।’ हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
*परिवहन की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा लेकिन…*
परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट ‘परिवहन’ पर आवेदक अपनी जरूरत की सेवा चुनकर ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। संबंधित सेवा के लिए निर्धारित सरकारी शुल्क की जानकारी भी प्रक्रिया के दौरान दिखाई देती है। आवेदक शुल्क का ऑनलाइन भुगतान कर सकता है। ऐसे में सरकारी शुल्क पहले से पता होने के बावजूद अतिरिक्त रकम की मांग की शिकायत व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।
वहीं आरटीओ कार्यालय के बाबू का कहना है कि सभी काम पारदर्शिता से किए जाते हैं और लोग ऑनलाइन सेवाओं का लाभ ले सकते हैं।
*अब रिकॉर्ड से हो जांच*
ऑनलाइन आवेदन और निस्तारण का रिकॉर्ड विभाग के पास उपलब्ध है। इसकी जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि सीधे आवेदन करने वाले और बिचौलियों के माध्यम से आने वाले मामलों के निस्तारण में कोई अंतर है या नहीं। साथ ही अतिरिक्त रकम मांगने की शिकायतों की जांच भी जरूरी है।
सरकारी सेवा निर्धारित शुल्क पर मिले और नागरिक को अपना काम कराने के लिए बिचौलिए की जरूरत न पड़े, ऑनलाइन व्यवस्था की असली कसौटी यही है।
उपलब्ध जानकारी के आधार पर, वास्तविक शुल्क सेवा, वाहन की श्रेणी और टैक्स के अनुसार विभागीय रिकॉर्ड से सत्यापित किया जाना चाहिए।
*आरटीओ ने कहा…*
आरटीओ विक्रमजीत सिंह कंग का कहना है कि आरटीओ के नाम पर कोई पैसा मांगता है तो शिकायत करें, जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। यह सही है आवेदन आनलाइन स्वीकार किये जाते है। नेटवर्क ड्रॉप की परेशानी है,जल्द ही दूर करा ली जाएगी।
