सिवनी: सच्चे शिक्षक वे हैं जो हमें खुद के लिए सोचना सिखाते हैं। किताबी ज्ञान ही नहीं इंसानियत का भी पाठ पढ़ाते है किसी विद्यार्थी को शायद अपनी पहली किताब का नाम याद ना रहे परीक्षा में मिले अंक भी समय के साथ भूल जाएं, लेकिन एक शिक्षक की कही हुई कोई छोटी सी बात, पर पूरी जिंदगी उसके भीतर घुमती रह सकती है तुम कर सकते हो ,गलती से सीखो, सवाल पूछने से पीछे मत रहो ,ऐसे शब्द कभी-कभी पूरी जिंदगी की दिशा बदल देते हैं यही शिक्षक की असली ताकत है।
शिक्षक दिवस के अवसर पर छात्र कल्याण परिषद द्वारा महारानी लक्ष्मीबाई कन्यशाला की प्राचार्य श्रीमती अमिता बांगरें कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य ओम प्रकाश सरवैया, पंकज शैडें, अशोक जैन, राशिद खान एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस हायर सेकेंडरी शाला सिवनी की प्राचार्य श्रीमती राजेश्वरी धुर्वे एवं अकिला खान, यादुराज उईके, का सम्मान किया गया।
इस अवसर पर शाला के बच्चों द्वारा भी समस्त शिक्षकों का सम्मान किया गया बच्चों ने शिक्षकों को स्मृति चिन्ह भेंट किया साथ ही अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम का कार्यक्रम आयोजित किया गया शिक्षकों ने कहा कि भारतीय गुरु शिष्य परंपरा में गुरु केवल विषय नहीं चाहता वह शिष्य को जीवन अनुशासन व्यवहार और जिम्मेदारी की शिक्षा देता था सीखना किताब से ज्यादा जीवन के अनुभव से जोड़ा था आज वही रिश्ता आधुनिक रूप ले चुका है ब्लैक बोर्ड की जगह स्मार्ट बोर्ड है किताबों के साथ डिजिटल सामग्री है और कक्षा के साथ ऑनलाइन मंच शिक्षक अभियान का अखिल स्रोत नहीं बल्कि मार्गदर्शन और सीखने की प्रक्रिया का संचालक है।
इस अवसर पर छात्र कल्याण परिषद के संजय जैन ने कहा कि भारत में शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाने वाले अनेक महान शिक्षक हुए हैं उन्होंने युवाओं को बड़े सपने देखने और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की प्रेरणा दी वहीं कृष्ण राधा कृष्ण ने दर्शन और शिक्षा को राष्ट्र जीवन से जोड़ इन तीनों के जीवन से एक बात स्पष्ट होती है कि सच्चा शिक्षक केवल विद्यार्थी नहीं समाज की दिशा बदलता है।
