
सिंगरौली । आम नागरिकों को सस्ता और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नगर निगम क्षेत्र में लाखों रुपये खर्च कर स्थापित किए गए वाटर एटीएम अब अपनी उपयोगिता को लेकर सवालों के घेरे में हैं।
करीब 57 लाख रुपये की लागत से लगाए गए तीन वाटर एटीएम में से जनता को नियमित सुविधा नहीं मिल पाने के आरोप हैं। वहीं, बंद अथवा अनुपयोगी पड़े उपकरणों की चोरी की घटनाओं ने निगम की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार ननि क्षेत्र में फल मंडी मोरवा, शहरी तहसील परिसर और वार्ड क्रमांक 40 में मल्हार पार्क के सामने चौपाटी क्षेत्र में वाटर एटीएम स्थापित किए गए हैं। आरोप है कि स्थापना के बावजूद इनका संचालन अपेक्षित रूप से नहीं हो पा रहा है। गर्मी, बारिश और ठंड जैसे मौसम में भी लोगों को इनसे नियमित पेयजल सुविधा नहीं मिल रही है। सबसे गंभीर सवाल इनके रखरखाव को लेकर उठ रहे हैं। आरोप है कि वाटर एटीएम नियमित रूप से संचालित नहीं होने के बावजूद मेंटेनेंस के नाम पर कई बार भुगतान किया गया। दूसरी ओर उपकरणों की चोरी से यह सवाल भी उठ रहा है कि लाखों की संपत्ति की सुरक्षा के लिए निगम ने क्या व्यवस्था की है। वाटर एटीएम पर हुए कुल खर्च और भुगतान का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किए जाने की बात भी कही जा रही है।
शहर के कई स्मार्ट टॉयलेट भी बने शोपीस
वार्ड 40 के पार्षद ने वाटर एटीएम की स्थापना और संचालन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि जनता को सुविधा ही नहीं मिलनी है तो इतनी बड़ी राशि खर्च करने का औचित्य क्या है। उनका कहना है कि वाटर एटीएम लगाए जाने की जानकारी तक उन्हें नहीं दी गई। इसी वार्ड में स्मार्ट टॉयलेट की स्थिति भी चर्चा में है। न्यायालय परिसर के समीप स्थापित स्मार्ट टॉयलेट हटाया जा चुका है, जबकि राजमाता चूनकुमारी स्टेडियम के मुख्य द्वार के सामने लगा स्मार्ट टॉयलेट भी अपेक्षित उपयोग में नहीं आ रहा है। अब सवाल है कि जनता की सुविधा के नाम पर खर्च हुई राशि का वास्तविक लाभ नागरिकों को कब मिलेगा और वाटर एटीएम व स्मार्ट टॉयलेट की लागत, मेंटेनेंस भुगतान, संचालन तथा सुरक्षा व्यवस्था का नगर निगम कब स्पष्ट ब्यौरा सार्वजनिक करेगा।
