जबलपुर:मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने एकलपीठ की उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें राज्य सरकार को एक दिव्यांग महिला कर्मचारी को टाइपिंग टेस्ट पास नहीं करने बावजूद भी इंक्रीमेंट देने के निर्देश जारी किये थे। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि वर्तमान में कम्प्यूटर से कार्य किया जाता है।
सरकार की तरफ से दायर अपील में कहा गया था कि एकलपीठ का उक्त आदेश इंक्रीमेंट देने से दूसरे कर्मचारियों के लिए बिना ज़रूरी योग्यता के भी वेतन में ऐसी ही बढ़ोतरी की मांग करने का एक उदाहरण बन सकता है।
युगलपीठ ने सरकार के तर्क को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा कि इंक्रीमेंट देने से कोई गलत उदाहरण बनने की आशंका पूरी तरह से बेबुनियाद है। याचिकाकर्ता कुमारी संजू यादव और 24 अन्य दिव्यांग कर्मचारियों के मामले पर सरकार ने 15 अप्रैल, 1999 के आदेश के ज़रिए सहानुभूति के आधार पर नियुक्ति देने के लिए सभी शर्तों में छूट देते हुए एक विशेष मामले के तौर पर पुनर्विचार किया था।
याचिकाकर्ता की नियुक्ति उस समय एक विशेष मामले के तौर पर की गई थी, तो ऐसे विशेष हालात के आधार पर दिए गए कोर्ट के फैसले का हवाला सामान्य हालात और नियमों के तहत नियुक्त कोई कर्मचारी इसकी मांग नही कर सकता है। युगलपीठ ने कहा है कि 1999 के आदेश से यह साफ है कि राज्य सरकार ने गवर्नर के नाम पर 25 दिव्यांग लोगों की नियुक्ति के लिए शर्तों व रोक में छूट दी थी। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ सरकार की अपील खारिज कर दी।
