क्या इंदौर भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है ?

सियासत

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में इंदौर में विश्वकीर्तिमान स्थापित करने वाले पौधा रोपण कार्यक्रम में शिरकत की। कहा जा रहा था कि यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर प्रदेश सरकार द्वारा किया गया लेकिन इस कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से भाजपा का अंदरूनी घमासान और गुटीय विभाजन दिखा। यह कार्यक्रम इंदौर के एक गुट का बनकर रह गया। सबसे पहले सुमित्रा ताई ने पत्र लिखकर पौधारोपण अभियान के लक्ष्य को लेकर तरह-तरह के संदेह जताए। उन्होंने एक पत्र भी लिखा। इस पत्र का मजमून यही था कि इतना बड़ा कार्यक्रम बिना सभी से चर्चा करके घोषित कर दिया गया। यानी सुमित्रा ताई बताना चाह रही है थी कि इंदौर में भाजपा का एक शक्तिशाली गुट मनमाने फैसले कर रहा है।

इसके बाद हुआ यह कि इस कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर जितनी भी बैठकें हुई, उनमें मनोज पटेल, उषा ठाकुर, मालिनी गौड़, महेंद्र हार्डिया यहां तक की कुछ कार्यक्रमों में तो रमेश मेंदोला भी नजर नहीं आए। यही नहीं इन विधायकों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र में भी पौधारोपण अभियान के नाम पर एक भी पौधा नहीं रोपा। पूर्व विधायक और भाजपा के कार्यक्रमों में उत्साह के साथ शिरकत करने वाले सुदर्शन गुप्ता भी कार्यक्रम की मेन फ्रेम से गायब थे।उषा ठाकुर जरूर महू में एक कार्यक्रम में शामिल हुई, लेकिन उन्होंने वहां भी अंतर सिंह दरबार की मौजूदगी वाले कार्यक्रम का बहिष्कार किया।

सबसे बड़ी बात यह है कि हर बार क्षेत्र क्रमांक 2 के शक्तिशाली गुट के कार्यक्रमों की व्यवस्था संपूर्ण रूप से रमेश मेंदोला के कंधों पर रहती थी, लेकिन इस बार भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी संजय शुक्ला और विशाल पटेल को दी गई। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि रमेश मेंदोला ने अपनी राहें जुदा कर ली है, लेकिन इस बार उनकी मौजूदगी वैसी नहीं दिखी जैसी हर बार रहती है। इंदौर के मेयर स्पष्ट रूप से मंत्री खेमे के साथ नजर आए। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व का पर्याय माने जाते हैं। उनकी हैसियत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद मानी जाती है। भाजपा के इतने शक्तिशाली नेता की मौजूदगी के बावजूद कार्यक्रम में भाजपा की भीतरी खींचतान का दिखना यह बताता है कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। सुमित्रा ताई की नाराजगी का संकेत समझते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव अपना पद संभालने के लगभग 6 महीने बाद ताई से मिलने उनके निवास पर पहुंचे। मुख्यमंत्री का ताई के निवास पर जाना भी यह बताता है कि इंदौर भाजपा में क्या चल रहा है ?

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