
नयी दिल्ली, 04 सितंबर (वार्ता) भारत में दुनिया का सबसे बड़ा प्रकाशन बाजार बनने की क्षमता है और देश का पुस्तक प्रकाशन बाजार वित्त वर्ष 2030-31 तक दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
पूर्व शिक्षा सचिव संजय कुमार का कहना है कि भारत चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा प्रकाशन उद्योग है और उसमें दुनिया का सबसे बड़ा प्रकाशन बाजार बनने की क्षमता है। उन्होंने प्रकाशन उद्योग को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था, मानवीय जुड़ाव और नवाचार का प्रमुख वाहक बताते हुए भारत को ‘मेक इन इंडिया’ की भावना के अनुरूप दुनिया का प्रिंटिंग हब बनाने की दिशा में प्रयास करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट बाजार को औपचारिक रूप देने और साक्ष्य आधारित निर्णय लेने में मदद करेगी।
नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया के निदेशक युवराज मलिक ने कहा कि भारत का प्रकाशन उद्योग महत्वपूर्ण बदलाव के दौर में है। देश का विशाल पाठक एवं शिक्षार्थी आधार, भाषाई विविधता और बढ़ती तकनीकी क्षमताएं भारत को वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने की क्षमता प्रदान करती हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स और नीलसनआईक्यू बुकडाटा की ओर से जारी ‘इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट 2026-2030’ में भारत के प्रकाशन क्षेत्र के आकार, संरचना और विकास के साथ प्रिंट, डिजिटल, शैक्षणिक, शोधपरक तथा भारतीय भाषाओं के प्रकाशन के भविष्य का आकलन किया गया है। रिपोर्ट शिक्षा, भाषाओं, प्रौद्योगिकी, अधिकार, पहुंच और नीति सहित उन विभिन्न कारकों का अध्ययन करती है, जो इस बदलाव को आकार दे रहे हैं।
रिपोर्ट में प्रकाशन क्षेत्र में विकास, नवाचार और निवेश के उभरते अवसरों के साथ कॉपीराइट संरक्षण, रचनाकारों के अधिकार और जिम्मेदार तकनीकी उपयोग के महत्व का उल्लेख किया गया है। इसमें भारत के वैश्विक अकादमिक प्रकाशन क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाने की क्षमता के साथ शोध की गुणवत्ता एवं सत्यनिष्ठा तथा टिकाऊ कारोबारी मॉडल को भी आवश्यक बताया गया है। रिपोर्ट का राष्ट्रीय स्तर पर विमोचन तीन सितंबर को नयी दिल्ली में किया गया।
