ग्वालियर: केवल पेट भरना ही पर्याप्त पोषण नहीं है, बल्कि भोजन में आयरन, आयोडीन जैसे जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा भी जरूरी है। इसी संदेश के साथ कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर में खाद्य फोर्टिफिकेशन को लेकर छात्र-छात्राओं के लिए जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कृषि विज्ञान केन्द्र, ग्वालियर के सभागार में हुई कार्यशाला में जीवाजी विश्वविद्यालय एवं साइंस कॉलेज के विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
राज्य तकनीकी सहयोग इकाई द्वारा आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक अनुसंधान सेवाएं डॉ. आर.ए. कौशिक ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने खाद्य पिरामिड के माध्यम से पोषण सुरक्षा की जानकारी देते हुए पोषण-संवेदी कृषि, खाद्य सुदृढ़ीकरण और बायो-फोर्टिफिकेशन के महत्व पर प्रकाश डाला। बच्चों एवं किशोरी बालिकाओं में आयरन की कमी दूर करने में फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों की भूमिका भी समझाई।
नोडल अधिकारी एवं कृषि विज्ञान केन्द्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रीता मिश्रा ने राज्य तकनीकी सहयोग इकाई की भूमिका, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा फोर्टिफिकेशन से जुड़े भ्रम और मिथकों की जानकारी दी।
कार्यशाला में फोर्टिफाइड चावल और डबल फोर्टिफाइड नमक से खिचड़ी, बड़ी और पापड़ तैयार करने का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। विद्यार्थियों को डबल फोर्टिफाइड नमक में आयरन एवं आयोडीन की जांच भी करके दिखाई गई। प्रतिभागियों को फोर्टिफाइड चावल और डबल फोर्टिफाइड नमक से तैयार खिचड़ी परोसी गई।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों से संवाद और प्रतिपुष्टि ली गई। डॉ. रीता मिश्रा ने निष्कर्षात्मक संबोधन दिया तथा एसटीएसयू कंसल्टेंट मनोज कुमार रावत ने आभार व्यक्त किया। आयोजन में कु. रितु सिंह सहित कृषि विज्ञान केन्द्र के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सहयोग रहा।
