बीए प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम में बड़ी संख्या में पूरक आने से विद्यार्थियों में आक्रोश, एआईडीएसओ ने पुनः जांच एवं संशोधित परिणाम घोषित करने की मांग की

देवास। सम्राट विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन द्वारा हाल ही में घोषित बीए प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम को लेकर विद्यार्थियों में भारी असंतोष एवं चिंता देखने को मिल रही है। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों में पूरक प्रदान की गई है, जिसके कारण विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस संबंध में छात्र संगठन ए.आई.डी.एस.ओ. द्वारा प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, देवास के प्राचार्य के माध्यम से सम्राट विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलसचिव के नाम ज्ञापन सौंपकर परीक्षा परिणाम की पुनः जांच एवं आवश्यक सत्यापन करवाने की मांग की गई। छात्र संगठन ए.आई.डी.एस.ओ. के जिला अध्यक्ष विनोद प्रजापति ने बताया कि अनेक ऐसे विद्यार्थी हैं, जिन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा में अच्छे अंकों के साथ सफलता प्राप्त की है, लेकिन महाविद्यालय में प्रवेश लेने के बाद उनके परीक्षा परिणाम अपेक्षा के विपरीत एवं अत्यंत खराब आए हैं।

बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के परिणाम प्रभावित होने से परीक्षा परिणाम की शुद्धता को लेकर विद्यार्थियों के मन में गंभीर आशंका उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि इस परिणाम का सीधा असर विद्यार्थियों की आर्थिक एवं मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है। जिन विद्यार्थियों को पूरक आई है, उन्हें दोबारा परीक्षा देने के लिए अतिरिक्त शुल्क जमा करना पड़ेगा। एक पूरक विषय की परीक्षा फीस लगभग 2,300 रुपये के आसपास होने के कारण गरीब एवं सामान्य परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। यदि किसी विद्यार्थी को एक से अधिक विषयों में पूरक आती है तो यह आर्थिक बोझ और अधिक बढ़ जाता है। विद्यार्थियों का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति पहले ही कठिन है, ऐसे में बिना किसी स्पष्ट कारण के दोबारा परीक्षा शुल्क देना उनके लिए बड़ी परेशानी है। जिला सचिव विजय मालवीय ने कहा कि विद्यार्थियों ने पूरे वर्ष मेहनत और लगन से पढ़ाई की है। परीक्षा परिणाम उनके भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में यदि परिणाम में किसी प्रकार की तकनीकी, मूल्यांकन या अन्य त्रुटि हुई है तो उसका खामियाजा विद्यार्थियों को आर्थिक और मानसिक रूप से नहीं भुगतना चाहिए।

उन्होंने बताया कि पूर्व में भी विश्वविद्यालय द्वारा घोषित परीक्षा परिणामों में त्रुटियां सामने आ चुकी हैं, जिन्हें बाद में जांच के उपरांत विश्वविद्यालय द्वारा सुधारा गया था। ऐसी स्थिति को देखते हुए इस बार भी परीक्षा परिणाम में किसी प्रकार की तकनीकी अथवा मूल्यांकन संबंधी त्रुटि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

छात्र संगठन एआईडीएसओ ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि बीए प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम की पुनः जांच एवं आवश्यक सत्यापन करवाया जाए। यदि किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है तो तत्काल सुधार कर संशोधित परीक्षा परिणाम पुनः घोषित किया जाए। साथ ही विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम से संबंधित स्पष्ट एवं उचित जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

एआईडीएसओने चेतावनी दी कि विद्यार्थियों की इस गंभीर समस्या का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो संगठन विद्यार्थियों के हित में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

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