भोपाल। रिहायशी इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों पर सीलिंग की कार्रवाई से व्यापारी परेशान हैं। व्यापारियों की मांग है कि नया मास्टर प्लान जल्द लागू किया जाए।
लेकिन सवाल है—
क्या मास्टर प्लान आने से व्यापारियों को सच में राहत मिलेगी?
और क्या इससे अभी चल रही सीलिंग की कार्रवाई पर कोई असर पड़ेगा?
भोपाल के कई पुराने इलाकों में सालों से दुकानें, ऑफिस, क्लीनिक और दूसरे कारोबार चल रहे हैं। अब कार्रवाई के बाद व्यापारियों का तर्क है कि शहर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए नए मास्टर प्लान में ऐसे इलाकों के लिए स्पष्ट कमर्शियल या मिक्स्ड लैंड यूज तय किया जाना चाहिए।
वहीं जब हमने व्यापारी संघ के अध्यक्ष से बात की तो उन्होंने कहा- “हमारी मांग है कि पुराने कारोबार को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान में व्यावहारिक प्रावधान किए जाएं…”
लेकिन यहां सबसे अहम सवाल है— अगर मास्टर प्लान में किसी इलाके का Land Use बदल जाता है, तो क्या वहां चल रहा कारोबार अपने आप वैध हो जाएगा?
जानकारों के मुताबिक Land Use और किसी भवन या कारोबार की बाकी जरूरी अनुमतियां अलग-अलग चीजें हैं।
भोपाल के पूर्व ADM, जी पी माली ने कहा- “मास्टर प्लान में बदलाव से राहत की गुंजाइश हो सकती है, लेकिन इससे हर नियम अपने आप खत्म नहीं होता…”
यानी मास्टर प्लान भविष्य की प्लानिंग बदल सकता है… लेकिन क्या इससे आज जिन दुकानों पर सीलिंग हो रही है, उनकी सील खुल जाएगी? इसपर उन्होंने कहा- “सिर्फ मास्टर प्लान आने से सीलिंग अपने आप खत्म होगी या प्रतिष्ठान अपने आप वैध हो जाएंगे, ऐसा नहीं कहा जा सकता। इसके लिए संबंधित नियम और अनुमति देखना जरूरी होगा।”
तो तस्वीर साफ है— व्यापारियों के लिए मास्टर प्लान उम्मीद जरूर है, लेकिन सिर्फ मास्टर प्लान आ जाने से सीलिंग रुकना तय नहीं है। ऐसे में अब देखना होगा कि आने वाले वक्त में व्यापारियों की मुसीबत और बढ़ती है या फिर इसका कोई निराकरण निकाला जाएगा.
