उज्जैन: 125 दिन तक चलने वाले विक्रम उत्सव में कई प्रकल्प ऐसे हैं, जो आमजन को लुभा रहे हैं. विक्रमादित्य शोधपीठ परिसर में आर्ष भारत प्रदर्शनी भी लगाई गई है जिसमें खासा प्रतिसाद मिल रहा है.महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा विक्रमादित्य, उनके युग, भारत उत्कर्ष, नवजागरण और भारत विद्या पर एकाग्र विक्रमोत्सव 2025 अंतर्गत शोधपीठ कार्यालाय परिसर, बिड़ला भवन में भारतीय ऋषि वैज्ञानिक परंपरा पर केन्दि्रत आर्ष भारत प्रदर्शनी लगाई गई है.
दुर्लभ सामग्रियों का प्रदर्शन
अश्विनी शोध संस्थान महिदपुर की प्राचीन व दुर्लभ अस्त्र शस्त्र, सील सिक्के की प्रदर्शनी को प्रदर्शित किया गया है।इस आर्ष भारत प्रदर्शनी में भारत के प्राचीन ऋषि-मुनियों के वैज्ञानिक योगदान को चित्रों और जानकारी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है.
खोज और योगदान
प्रदर्शनी में आर्यभट्ट, चरक, सुश्रुत, कणाद, पतंजलि, भास्कराचार्य जैसे सैंकड़ों महान ऋषि वैज्ञानिकों की खोजों और उनके योगदान को दर्शाया गया है. भारतीय ऋषि वैज्ञानिक परंपरा पर केन्दि्रत आर्ष भारत प्रदर्शनी में 100 से अधिक ऋषियों, मनीषियों, महापुरूषों के चित्रों को देशभर के चित्रकारों ने तैयार किया है. यह प्रदर्शनी भारतीय ऋषियों द्वारा दिये गये वैज्ञानिक योगदान को बताती है और यह स्पष्ट करती है कि भारतीय वैज्ञानिक परंपरा कितनी समृद्ध थी.
दर्शनीय संग्रहण
इसके साथ ही अश्विनी शोध संस्थान महिदपुर द्वारा विक्रमकालीन मुद्रा एवं मुद्रांक प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र है. प्रदर्शनी में ईसा पूर्व प्रथम शताब्दी से लगाकर वर्तमान की मुद्राओं का एक बेहद दर्शनीय संग्रह मौजूद है.
30 मार्च तक प्रदर्शनी
हजारों वर्ष पुराने प्राचीन हथियार खंजर, तोप के गोले, तलवार व ढाल, कुल्हाड़ियाँ, तीर के फलक, धुरे, कवच भी प्रदर्शित है. 30 मार्च तक आयोजित यह प्रदर्शनी उज्जैन के लोगों के लिए रोजना सुबह 11 से शाम 8 बजे तक अवलोकनार्थ खुली है
