भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फॉर डिस्ट्रिक्ट्स (पीजीआई-डी) 2025-26 रिपोर्ट का हवाला दिया है।
एक प्रेस वक्तव्य में जीतू पटवारी ने कहा कि देश के 784 जिलों का 600 अंकों के पैमाने पर किया गया मूल्यांकन मध्य प्रदेश में शिक्षा को लेकर किए जा रहे दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़े अंतर को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि इस सूचकांक में लर्निंग आउटकम, शिक्षक, आधारभूत संरचना, स्कूल सुरक्षा एवं बाल संरक्षण, डिजिटल लर्निंग और प्रशासन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों का आकलन किया गया है।
पटवारी के अनुसार, मध्य प्रदेश का एक भी जिला 60 प्रतिशत प्रदर्शन के स्तर को पार नहीं कर सका। प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिले को भी 600 में से केवल 333 अंक, यानी 55.5 प्रतिशत प्राप्त हुए।
उन्होंने दावा किया कि भोपाल में लर्निंग आउटकम लगभग 47 प्रतिशत और स्कूल सुरक्षा 37 प्रतिशत रही, जबकि इंदौर में स्कूल सुविधाएं करीब 41 प्रतिशत और लर्निंग आउटकम 47 प्रतिशत दर्ज किए गए। सागर, बड़वानी, आगर-मालवा और धार सहित कई जिलों में डिजिटल लर्निंग के कम अंक मिलने पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की।
जीतू पटवारी ने कहा कि ये आंकड़े किसी कांग्रेस सर्वेक्षण के नहीं, बल्कि यू-डाइस प्लस, परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 और प्रबंध जैसे सरकारी स्रोतों पर आधारित हैं। उन्होंने जिला-वार सार्वजनिक समीक्षा, कमजोर क्षेत्रों के लिए समयबद्ध सुधार योजना, डिजिटल संसाधनों और स्कूल सुरक्षा का स्वतंत्र ऑडिट तथा लर्निंग आउटकम की नियमित सार्वजनिक समीक्षा की मांग की।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के बच्चों के भविष्य को प्रचार से ऊपर रखते हुए स्कूली शिक्षा में सुधार पर खुली सार्वजनिक बहस होनी चाहिए।
