भोपाल। कांग्रेस नेता अभिनव बरोलिया ने बड़े बैंक ऋणों की राइट-ऑफ और कॉरपोरेट दिवालियापन मामलों में भारी ‘हेयरकट’ पर सवाल उठाते हुए आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों, छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए राष्ट्रीय ऋण राहत नीति बनाने की मांग की है।
शनिवार को जारी एक प्रेस बयान में बरोलिया ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि वर्ष 2014-15 से 30 सितम्बर 2025 तक बड़े उद्योग और बड़ी सेवा श्रेणियों के अंतर्गत बैंकों ने करीब 9.87 लाख करोड़ रुपये के ऋण राइट-ऑफ किए हैं।
उन्होंने कहा कि ऋण राइट-ऑफ और कॉरपोरेट दिवालियापन मामलों में ‘हेयरकट’ अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा की गई वास्तविक वसूली और वास्तविक नुकसान को लेकर अधिक पारदर्शिता जरूरी है।
बरोलिया ने कहा कि बेरोजगारी, फसल खराब होने या व्यापार में घाटे जैसी परिस्थितियों में आम कर्जदार बढ़ते ब्याज, जुर्माने और किस्तों के बोझ तले दब जाते हैं। उन्होंने वास्तविक आर्थिक संकट से गुजर रहे कर्जदारों के लिए ऋण पुनर्गठन की आसान व्यवस्था, भुगतान अवधि बढ़ाने, ब्याज में राहत और लक्षित ऋण सहायता की मांग की।
उन्होंने इसे आर्थिक न्याय का महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए किसानों, छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए प्रभावी राष्ट्रीय ऋण राहत नीति लागू करने की मांग की।
