अंचल में भुजरिया पर्व उत्साह के साथ मनाया गया

बागली। बागली के आसपास 12 से अधिक ग्राम पंचायतो में निमाड़ क्षेत्र से आए परिवारों की बहुलता बड़ी है। रक्षाबंधन के एक दिन बाद ही बाद भाद्रपद प्रतिपदा तिथि पर भुजरिया पर्व मनाया जाता है। इसे लोक भाषा में कजलियां पर्व भी कहते हैं। सेवनिया क्षेत्र के जनपद सदस्य सुरेश मौर्य तोर सिंह राठोर जालम आदी ने बताया कि इस दौरान बासं से बनी छोटी-छोटी टोकरियों में 15 दिन पूर्व सेही मिट्टी भरते हुए गेहूं और जौव बोए जाते हैं और उनकी विधिवत 5 दिन तक पूजा की जाती है गुड एवं घी की धूप देकर आसपास के सभी देवताओं सहित पूर्वजों को भी याद करते हुए कंकू चावल अगरबत्ती आदि से पूजा करते हुए फूल चढ़कर धूप दी जाती है।

रक्षाबंधन के एक दिन बाद फिर इन्हें प्रमुख स्थल चौराहे पर रखकर आसपास घूमते हुए लोक संस्कृति नृत्य किया जाता है। प्रत्येक स्थान पर पूजा करते हुए फिर से उठाकर अगले चौराहे पर फिर पूजा की जाती है ऐसे करते हुए समीप में बहने वाले नदी एवं नाले में जाकर इनका विसर्जन किया जाता है। मान्यता अनुसार जिन लोगों की मां या मन्नत पूरी होती है। वह अगले वर्ष अपने यहां भी ज्वारे बोकर परंपरा निभाते हैं। रामपुर मालीपुरा अंबा पानी गुवाड़ी चार बर्ड़ी डेरी बोरी क्षेत्र के लोगों द्वारा बताया गया कि इस दिन अनुयाई परीवालों के घरो पर खीर पूरी एवं भजिए का भोग लगाकर पर्व को मनाया जाता है। शाम को मंगल गीत गाने की परंपरा है। इस परंपरा का धीरे-धीरे मालवा क्षेत्र में भी विस्तार हो गया शनिवार को पूरे क्षेत्र से भुजरिया पर्व मनाया जाने के समाचार मिले

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Sat Aug 29 , 2026
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