रीवा:जिले में आपसी प्रेम और भाईचारे का प्रतीक कजलियां पर्व शनिवार को पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा. इस दौरान जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
कजलियां देकर एक दूसरे को शुभकामनाएं दी जाती है. यह पर्व आपसी प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है. शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक कजलियों का त्यौहार रक्षाबंधन के दूसरे दिन पारंपरागत रूप से मनाया जाता है. जहां महिलाएं, पुरुष, बच्चे अपनी सहभागिता उत्साह के साथ प्रदर्शित करते हैं.
नदी, तालाब और सरोबर में टोकरी और मिट्टी को विसर्जित कर कजलियां लेकर लौटने वाली महिलाओं व कन्याओं द्वारा सबसे पहले मंदिरों में जाकर भगवान को समर्पित किया जाता है फिर परिचितों, पड़ोसियों एवं घर के सदस्यों को कजलियां देकर अभिवादन एवं शुभकामनाएं दी जाती हैं. जहां बड़े-बुजुर्ग छोटों को आशीर्वाद प्रदान करेंगे, वहीं छोटों द्वारा बड़ों को प्रणाम किया जाता है.
रक्षाबंधन के दूसरे दिन कजलियां मनाने की पुरानी परम्परा है जो आज भी जीवंत है. यह पर्व पूरे उत्साह के साथ शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मनाया जाता है. इस पर्व को लेकर इस वर्ष लोगों में काफी उत्साह बना हुआ है. सभी जाति-धर्म के लोग एक-दूसरे को कजलियां देकर शुभकामनाएं देंगे. जिससे आपसी भाईचारे को बढ़ावा मिलता है. रीवा की कजलियां मशहूर है.
