
भोपाल। नवभारत में 26 मई 2026 को प्रकाशित मोर वन की बदहाल स्थिति पर विशेष रिपोर्ट का व्यापक असर देखने को मिला है। रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद वन विभाग ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण और प्रजनन काल में उनकी सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम शुरू कर दिए हैं।
रिपोर्ट के बाद वन विहार के फील्ड डायरेक्टर विजय कुमार स्वयं वन अधिकारियों की टीम के साथ मोर वन पहुंचे और पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जुलाई और अगस्त के महत्वपूर्ण प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए मोरों, उनके घोंसलों और नवजात चूजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए।
नवभारत ने अपनी रिपोर्ट में उजागर किया था कि आवारा कुत्तों के कारण मोरों के घोंसले नष्ट हो रहे हैं तथा अंडों और नवजात चूजों पर लगातार खतरा बना हुआ है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए वन विभाग ने कई प्रभावी कदम उठाए हैं।
विजय कुमार ने बताया कि मोर वन के मध्य में एक अस्थायी निगरानी चौकी स्थापित की गई है, जहां से वन अमला चौबीसों घंटे मोरों के घोंसलों पर नजर रखेगा। रात के समय दो कर्मचारी विशेष रूप से तैनात रहेंगे, जबकि दिन में तीन वनकर्मी लगातार गश्त कर घोंसलों और चूजों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्षा ऋतु के दौरान मोर वन में आम लोगों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, ताकि प्रजनन काल में पक्षियों को किसी प्रकार का व्यवधान न हो। उन्होंने कहा कि जैसे ही राष्ट्रीय पक्षी की स्थिति की जानकारी विभाग को मिली, इसे अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तत्काल संरक्षण संबंधी उपाय लागू किए गए।
फील्ड डायरेक्टर ने यह भी जानकारी दी कि इस वर्ष मोर वन में व्यापक स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा, जिससे हरित क्षेत्र बढ़ेगा और मोरों के लिए प्राकृतिक आवास और अधिक अनुकूल बनाया जा सकेगा।
उल्लेखनीय है कि आकाश गंगा कॉलोनी के रहवासियों ने भी लंबे समय से चिंता जताई थी कि पिछले कई वर्षों से मोर वन में मोरनियों को चूजों के साथ नहीं देखा गया है। ऐसे में वन विभाग की यह पहल न केवल राष्ट्रीय पक्षी के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, बल्कि मोर वन के प्राकृतिक पारिस्थितिक संतुलन को पुनर्स्थापित करने की दिशा में भी एक सकारात्मक प्रयास है।
