
जबलपुर, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल के बड़े तालाब किनारे बेदखली और बुलडोजर कार्रवाई के मामले को गंभीरता से लिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने कहा कि मामला लोगों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा है।
न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष जाने की स्वतंत्रता दी है और एनजीटी के न्यायिक व प्रशासनिक सदस्यों से आग्रह किया है कि आवेदन पेश होने पर मामले की शीघ्र सुनवाई की जाए।
भोपाल के भदभदा चौराहा स्थित प्रेमपुरा निवासी निसार खान, मोहसिन और एजाज खान ने इस संबंध में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि जिला प्रशासन ने बड़े तालाब से 50 मीटर के दायरे में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत उन्हें भी बेदखली का नोटिस जारी किया है। एनजीटी ने 117 अतिक्रमण हटाकर 31 अगस्त तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे जन्म से उक्त संपत्ति पर रह रहे हैं और उनका मकान तालाब से निर्धारित 50 मीटर की सीमा से बाहर है। इसके प्रमाण के तौर पर उन्होंने गूगल मानचित्र का भी हवाला दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मुकेश कुमार अग्रवाल ने पक्ष रखा और कहा कि उनके मुवक्किल एनजीटी में चल रही मूल कार्यवाही में पक्षकार नहीं थे, इसके बावजूद बिना पक्ष सुने बेदखली की कार्रवाई की जा रही है।
हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना याचिकाकर्ताओं को एनजीटी में आवेदन प्रस्तुत करने की छूट दी है।
