सरकार और सेबी की लापरवाही से हुआ 15 लाख करोड़ रुपये का घोटाला : कांग्रेस

नयी दिल्ली, 05 जून (वार्ता) कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) पर आरोप लगाया है कि बड़े आर्थिक अपराधों के मामले में उनकी लापरवाही के कारण शेयर बाजार में 15 लाख करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है जिससे निवेशकों का भरोसा निरंतर कमजोर हो रहा है और देश से हर घंटे करीब 400 करोड़ रुपये का निवेश बाहर जा रहा है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने शुक्रवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राजेश एक्सपोर्ट्स द्वारा किये इस घोटाले के कारण निवेशकों के 15 लाख करोड़ रुपए डूब गये है।

उन्होंने आरोप लगाया कि देश के निवेशक 15 लाख रुपये अपने खाते में आने की उम्मीद करते रहे, लेकिन “राजेश भाई” ने 15 लाख करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला कर लिया। उन्होंने कहा कि बड़े आर्थिक अपराधों के मामलों में कार्रवाई नहीं होने से निवेशकों का विश्वास डगमगा रहा है और देश का निवेश माहौल प्रभावित हो रहा है। श्री खेड़ा ने कहा कि सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रवर्तकों पर बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी तथा धन के गबन के आरोप लगाए हैं, लेकिन मामले की जांच शुरू करने में ही सात महीने लगा दिए। उनका कहना था कि मार्च 2024 में एक शेयरधारक ने शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उस पर लंबे समय तक कार्रवाई नहीं हुई। बाद में सेबी ने जांच शुरू की तो दो दिन पहले यानि तीन जून को आदेश जारी कर राजेश मेहता तथा कंपनी को प्रतिभूति बाजार में कारोबार से प्रतिबंधित कर दिया गया।

उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2016 में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने राजेश एक्सपोर्ट्स में 1.99 प्रतिशत निवेश किया था, जो 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 10.80 प्रतिशत हो गया। उनके अनुसार एलआईसी के अलावा बड़ी संख्या में छोटे निवेशकों ने भी कंपनी में निवेश किया। फरवरी 2023 में कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब 28 हजार करोड़ रुपये था, जो आज घटकर लगभग तीन हजार करोड़ रुपये रह गया। इस गिरावट से निवेशकों के करीब 25 हजार करोड़ रुपये डूब गए। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि 2015 में राजेश एक्सपोर्ट्स ने 40 करोड़ डॉलर का निवेश कर स्विट्जरलैंड की एक गोल्ड रिफाइनरी का अधिग्रहण किया, लेकिन सेबी ने इसकी पर्याप्त जांच नहीं की। उनका कहना था कि स्वर्ण आभूषण और रत्न कारोबार से जुड़ी कंपनी का ऊर्जा भंडारण क्षेत्र से कोई संबंध नहीं था, फिर भी 23 मार्च 2022 को उसे 18,100 करोड़ रुपये की लागत वाली पांच गीगावाट क्षमता की परियोजना आवंटित कर दी गई। उन्होंने कहा कि इस निविदा प्रक्रिया में ऊर्जा भंडारण क्षेत्र से जुड़ी सात अन्य कंपनियां भी शामिल थीं।

श्री खेड़ा ने कहा कि 2020-21 से 2024-25 के बीच राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपने खातों में 15.15 लाख करोड़ रुपये का कारोबार दर्शाया, लेकिन किसी एजेंसी ने इसकी गंभीरता से जांच नहीं की। कंपनी बार-बार अपने ऑडिटर बदलती रही, जो अपने आप में एक चेतावनी का संकेत भी था। शेयरधारक की शिकायत में यह भी कहा गया था कि सामान बेचने के बाद 2,914 करोड़ रुपये की राशि दो वर्षों तक वसूल नहीं की गई, लेकिन इस पर भी समय रहते ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान कंपनी ने कुछ सूचनाएं उपलब्ध कराने में सहयोग नहीं किया इसके बावजूद नियामक एजेंसियां प्रभावी कदम उठाने में विफल रहीं। उनका कहना था कि सेबी को कंपनी के नकदी प्रवाह, अप्रमाणित लेनदेन और दस्तावेजों के संबंध में कड़े सवाल पूछने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू), गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) और सेबी जैसी एजेंसियां इस दौरान क्या कर रही थीं। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि कथित अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हुई और इसके लिए जवाबदेही किसकी है।

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