
नयी दिल्ली, 20 जून (वार्ता) सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रताप वेणुगोपाल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से जारी समन पर स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया है।
श्री वेणुगोपाल को यह समन एक मुवक्किल को दी गई कानूनी सलाह के संबंध में जारी किया गया है।
एसोसिएशन ने चिंता व्यक्त की कि इस तरह की कार्रवाइयों से कानूनी पेशे की स्वतंत्रता पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। मुवक्किलों को दी गई पेशेवर राय के लिए अधिवक्ताओं को समन भेजना कानूनी प्रणाली के मूलभूत सिद्धांतों को कमजोर करता है।
ईडी ने 18 जून को श्री वेणुगोपाल को समन जारी किया था, जिसमें रेलिगेयर एंटरप्राइजेज की पूर्व चेयरपर्सन डॉ. रश्मि सलूजा को दिए गए कर्मचारी स्टॉक स्वामित्व योजनाओं के संबंध में मेसर्स केयर हेल्थ इंश्योरेंस लिमिटेड
(सीएचआईएल) को उनकी कानूनी सलाह से संबंधित दस्तावेज की जानकारी मांगी गई थी।
समन में सीएचआईएल, रेलिगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड (आरईएल) या उनकी संबद्ध संस्थाओं द्वारा कानूनी सेवाओं के लिए किए गए भुगतान का विवरण भी मांगा गया है।
श्री वेणुगोपाल को 27 जून को मुंबई में ईडी के सहायक निदेशक के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है। यह कदम इसी मामले के संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार को पहले जारी किए गए इसी तरह के समन के बाद उठाया गया है।
श्री दातार को भेजे गए समन की कानूनी बिरादरी ने वकीलों की पेशेवर स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए व्यापक रूप से निंदा की थी। बाद में ईडी ने कथित तौर पर श्री दातार को जारी किए गए समन को वापस ले लिया।
एससीएओआरए, मद्रास बार एसोसिएशन, दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन और गुजरात उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ सहित कई कानूनी निकायों ने इन समन का कड़ा विरोध किया है।
गुजरात एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश से हस्तक्षेप करने और कानूनी पेशे की पवित्रता और स्वायत्तता की रक्षा के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश तैयार करने का भी आह्वान किया है।
